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छत्तीसगढ़

पीईकेबी खदान के बंद होने से नौकरी जाने का डर सता रहा ग्रामीणों को खदान शुरू कराने दस दिनों से बैठे हैं धरने पर


अंबिकापुर। परसा ईस्ट और केते बासेन (पीईकेबी) कोयला खदान परियोजना के बंद होने की खबर से सरगुजा के जिला मुख्यालय सहित आस-पास के गांवों के व्यापारी चिंतित हैं, वहीं खदान में कार्यरत क्षेत्रीय कर्मचारियों को अब नौकरी जाने का भय सताने लगा है। पिछले एक दशक से पीईकेबी खुली खदान में ग्राम साल्हि, परसा, घाटबर्रा, फत्तेपुर, तारा इत्यादि ग्रामों के ग्रामीण काम करते हैं। इस परियोजना से सभी फल-फूल रहे थे, जिसके कारण अंचल के व्यापार के दायरे बढ़ गए थे। केंद्र और प्रदेश सरकार को कई सौ करोड़ की रॉयल्टी देने के साथ जो गांव, देश के मानचित्र में कोयला खदानों के लिए पहचाना जाने लगा था, उन क्षेत्रों के विकास को अब ग्रहण लगने वाला है। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) के सरगुजा जिले में उदयपुर विकासखंड अंतर्गत आने वाले पीईकेबी खुली खदान परियोजना में खनन का कार्य गत सप्ताह से थम गया है। वर्ष 2013 में चालू हुए इस खुली कोयला खदान में पांच हजार से अधिक स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। इससे दो गुने लोग अप्रत्यक्ष रूप से विभिन्न स्वरोजगारों से जुड़े हैं। विगत कई माह से सभी जरूरी अनुमति मिलने के पश्चात भी यहां खनन के दूसरे चरण का कार्य शुरू नहीं किया जा सका है, जिससे आरआरवीयूएनएल की खनन और विकास प्रचालक (एमडीओ) कंपनी ने ठेका कंपनी के कार्य में कटौती करना शुरू कर दिया है। ठेका कंपनियों में कर्मचारी स्थानीय ग्रामीण हैं जिन्हें एक दशक से नौकरी मिली है, उन कर्मचारियों की छुट्टी करनी पड़ सकती है। ऐसे ग्रामीण जिन्हें नोटिस मिल चुका है, उनके सामने एक बार फिर रोजगार का मुद्दा गहरा रहा है। वे सरकार से खदान के संचालन की अपील कर रहे हंै।
रैली निकालकर की आवाज बुलंद
अंबिकापुर-बिलासपुर के साल्हि मोड़ पर पिछले दस दिनों से धरने पर बैठे ग्रामीण मदद की गुहार लगा रहे हैं। इन सभी ने खदान को पुन: शुरू कराने प्रदेश शासन से गुहार लगाई है। एकजुटता दिखाने शनिवार को 150 से अधिक स्थानीय ग्रामीणों ने साल्हि मोड़ से पंचायत भवन स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा तक रैली निकालकर खदान शुरू कराने आवाज बुलंद की। रैली में ग्राम घाटबर्रा के अभिराम, शेखर तिर्की और इनके कई साथी, ग्राम साल्हि से सुनीन्द्र उइके, बुधराम उइके और साथी, ग्राम परसा के ओमप्रकाश और साथी, ग्राम तारा के चितेन्द्र और साथी तथा ग्राम फत्तेपुर के मदन सिंह, जगतपाल पोर्ते और साथी मौजूद थे। सभी ने रैली के दौरान नौकरी जाने के भय व इससे प्रभावित होने वाले कारणों को बताया।
बंद हो सकता है स्कूल, अधोसंरचना का काम
ग्रामीणों ने कहा अगर खदान का काम पुन: शुरू नहीं होता है तो गावों में कंपनी द्वारा चलाए जा रहे कई जनहित के कार्य प्रभावित होंगे। जिस इंग्लिश मीडियम स्कूल में बच्चे अभी मुफ्त में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, वह बंद हो सकता है। अधोसंरचना विकास के कई कार्य, जीविकोपार्जन और आजीविका संवर्धन के कार्य बंद हो जाएंगे। घर बैठे अच्छी स्वास्थ्य सुविधा पर असर पड़ सकता है। हाल में ग्राम साल्हि में 100 बिस्तरों के सर्व सुविधायुक्त अस्पताल के लिए जमीन चिन्हित की गई है, यह परियोजना खटाई में पड़ सकती है। ग्रामवासियों ने राज्य और केंद्र सरकार से जनहित के कार्यों के सुचारु संचालन व रोजी-रोटी के मद्देनजर पीईकेबी खदान को पुन: शुरू कराने का आग्रह किया है।

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