samvaad
छत्तीसगढ़

मच्छर डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, फाइलेरिया जैसी कई बीमारी की जड़ विश्व मच्छर दिवस पर सीएमएचओ ने कहा-वर्ष 2030 के पहले जिले को मलेरिया मुक्त करने की तैयारी


बलरामपुर। विश्व मच्छर दिवस पर मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी बसंत सिंह ने बताया डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, फाइलेरिया जैसी कई बीमारी की जड़ मच्छर है। इन बीमारियों से बचाव का एकमात्र उपाय सावधानी है। विगत पांच वर्षों से जिले में निरंतर मलेरिया के रोगियों में कमी आई है। जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में मलेरिया का इलाज बिल्कुल मुफ्त है। मच्छरों से बचने के लिए जिले में दवा उपचारित मच्छरदानी का वितरण किया जा रहा है। डीडीटी का छिड़काव  भी किया जाता है। मच्छरों से बचाव के लिए जन जागरूकता लाने लगातार प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। भ्रमण के दौरान लोगों को मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया हेतु सचेत किया जाता है।
डॉ.सिंह ने कहा कि मलेरिया को वर्ष 2030 के लक्ष्य से पहले जिले से समाप्त करने कारगर कदम उठाए जा रहे हैं। बलरामपुर जिले के कलेक्टर विजय दयाराम के. के निर्देशन में मच्छर जनित रोगों की समीक्षा बैठक भी की गई है व जिला टास्क फोर्स का गठन भी किया गया है। जिले में वर्ष 2017 में कुल 11008 मलेरिया के रोगी व जिले का एपीआई 13.5 था वहीं वर्ष 2021 में कुल 165 मलेरिया रोगी मिले, एपीआई 0.2 था। इससे साफ है कि जिले में लगातार मलेरिया के रोगियों में कमी आई है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुबोध सिंह ने बताया कि जिले में विगत वर्षों में मलेरिया से पीडि़तों की कमी का मुख्य कारण जन जागरूकता व मच्छरदानी का उपयोग करना है। मलेरिया, डेंगू व फाइलेरिया मच्छरजनित रोग हैं। वर्ष 2022 में मलेरिया के 38 रोगी अभी तक मिले हैं, वर्तमान में एक भी मलेरिया पीडि़त नहीं हैं। फाइलेरिया के 56 पीडि़त हैं, जिसमें 15 हाथी पांव के हैं, इन्हें रोग प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है। 41 हाइड्रोसील के पीडि़त हैं, इन्हें उपचार हेतु चिन्हांकित किया गया है। जिला मलेरिया अधिकारी ने विश्व मच्छर दिवस पर सभी से सोते वक्त मच्छरदानी का उपयोग करने, घर के आस-पास साफ सफाई रखने का आग्रह किया है। बता दें कि मच्छर पानी से पनपते हैं, इसीलिए ऐसी जगह जहां पानी एकत्रित हो उसे बहा दें। ऐसे जगहों में मच्छर अंडा नहीं देगा तो मच्छर नहीं पनपेंगे। इस संबंध में जिले में मितानिन के माध्यम से नारा लेखन भी कराया जा रहा है। जिला सलाहकार दिव्य किशोर गुप्ता ने बताया कि 20 अगस्त को डॉ.रोनाल्ड रास ने मादा एनाफिलीज मच्छर की खोज की थी, जो मलेरिया के कारक हैं। इस दिन को विश्व मच्छर दिवस के रूप में याद किया जाता है। मादा एनाफिलीज मच्छर परजीवी का काम करता है। उन्होंने बताया कि कई तरह के मच्छर हैं लेकिन कुछ ही मच्छर हंै जिनके कारण बीमारियां फैलती है। उन्होंने बताया कि जिले में एनाफिलीज मच्छर के कारण मलेरिया, क्यूलेक्स के कारण फाइलेरिया व एडीज के कारण डेंगू होता है। मच्छरों से बचने के कई उपाय हैं मगर इसका सबसे अच्छा उपाय मच्छरदानी का उपयोग करना है। जब भी सोने जाएं तो मच्छरदानी का उपयोग अवश्य करें। मच्छर भगाने के कई उपाय हैं जैसे स्प्रे क्रीम, लोशन, तेल का उपयोग भी किया जाता है। मच्छरों को भगाने के कुछ प्राकृतिक उपाय भी हैं जैसे नीलगिरी और नींबू का तेल, नीम का तेल, कपूर, पुदीना, लहसुन का उपयोग भी मच्छर भगाने के लिए किया जाता है। गांव में शाम को नीम के पत्ते को आग में जलाते हैं, यह भी मच्छर भगाने में असरदार रहता है।
जिले में मलेरिया की स्थिति
वर्ष 2017 में मलेरिया रोगियों की संख्या 11008, एपीआई 13.5, वर्ष 2018 में मलेरिया रोगी 3810, एपीआई 4.5, वर्ष 2019 में मलेरिया रोगी 2411, एपीआई 2.8, वर्ष 2020 में मलेरिया रोगी 444, एपीआई 0.5, वर्ष 2021 में मलेरिया रोगी 165 एपीआई 0.2, वर्ष 2022 में जनवरी से छह जुलाई की स्थिति में मलेरिया के 38 रोगी, एपीआई 0.0 है।

Leave a Reply