अंबिकापुर। आजादी के अमृत महोत्सव पर रायपुर में आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी स्व का संघर्ष-स्वाधीनता आंदोलन में सरगुजांचल के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर शोध कर रहे जिला पुरातत्व संघ सूरजपुर के सदस्य अजय कुमार चतुर्वेदी ने 38 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जीवन गाथा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया। शोध संगोष्ठी छह से आठ अगस्त तक आयोजित की गई थी।
अजय कुमार चतुर्वेदी ने इस मौके पर बताया सरगुजांचल कुछ वीर सपूतों की जन्मभूमि और कुछ की कर्मभूमि है। देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वाले वीर सपूतों के सामने आजादी के बाद जब जीविकोपार्जन की समस्या उत्पन्न हुई तो वे रोजगार की तलाश में सरगुजा आए। कुछ ने नौकरी के लिए सरगुजा को अपना कर्म क्षेत्र बनाया। अभी तक सरगुजा संभाग के 38 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के स्वजनों से मिल कर वेे उनकी जीवन गाथा का लेखन किए हैं, इनमें सरगुजा जिले के 14, बलरामपुर जिले के 03, सूरजपुर जिले के 02, कोरिया जिले के 11 और जशपुर जिले से 08 शामिल हैं। श्री चतुर्वेदी ने बताया कि इनमें 26 नाम सरगुजा गजेटियर 1989 में दर्ज हैं, लेकिन आज भी कई वीर सपूतों के नाम गुमनाम हैं। सरगुजांचल के ऐसे ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को ढ़ूंढकर और उनके स्वजनों से मुलाकात कर वे इनकी जीवन गााथा को लिखने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए कई वीर सपूतों ने आहूतियां दी थी, इनमें सरगुजांचल के मूल निवासी, जनजाति समुदाय के वीर सपूत भी शामिल हैं। शोधकर्ता ने बताया कि सरगुजांचल से तीन जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मिले हैं, जिनमें बलरामपुर जिले के कुसमी तहसील से महली भगत और शंकरगढ़ तहसील से राजनाथ भगत हैं। इनका कर्म क्षेत्र सरगुजांचल रहा है। सरगुजा जिले के अंबिकापुर तहसील निवासी स्व.माझीराम गोंड़ की जन्म भूमि और कर्मभूमि दोनों सरगुजांचल रही है। बता दें कि अजय चतुर्वेदी ने सरगुजा अंचल की कला, संस्कृति, पुरातत्व, लोक साहित्य, बोली, लोक गीत, लोक वाद्य और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर शोध कर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सरगुजांचल का नाम पहुंचाया है। इनके शोध पत्र पर आधारित आलेख कई माध्यम से प्रसारित हुए हैं। इन्होंने कई पुस्तकें भी लिखी है। इनके द्वारा लिखित रचनाएं छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक में भी शामिल किए गए हैं। इनके शोध पत्रों का प्रकाशन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हुआ है।
बाबू परमानंद जेल में हुए थे शहीद
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर शोध कर रहे अजय चतुर्वेदी ने बताया शोध के दौरान सरगुजांचल के सूरजपुर जिले के एक गुमनाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ब्रह्मचारी बाबू परमानंद की जानकारी मिली। वे 18 वर्ष 02 माह 08 दिन जेल में रहते देश की खातिर शहीद हो गए थे, लेकिन आजादी के 75 साल बीतने के बाद भी इन्हें शहीद या स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा नहीं मिल पाया है।
शहीद बाबू परमानंद 75 वर्ष बाद भी शहीद के दर्जा से वंचित महज 18 साल की उम्र में हुए थे सरगुजांंचल के इकलौते वीर सपूत शहीद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर शोध कर रहे अजय चतुर्वेदी ने सामने लाई ये बात

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