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छत्तीसगढ़

ये कैसी सफलता…कोयला चोरी के मामले में वाहन मालिक तक नहीं पहुंच पाई पुलिस अवैध कोयला चोरी पर अंकुश लगाने नहीं हो रहे सार्थक प्रयास


प्रतापपुर। वाहन चेकिंग के दौरान महान-2 दुप्पी चौरा की ओर से कुछ टीपर एवं पिकअप वाहन में अवैध कोयला लोड कर टुकूडांड होते चलगली की ओर जाते समय पुलिस ने लावारिस हाल में जब्त किया और वाहन मालिकों के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर वाहवाही लूटी लेकिन अभी तक न तो कोयला परिवहन कार्य में लगे वाहन चालक पुलिस के हाथ लगे हैं, ना ही वाहन मालिकों तक पुलिस के हाथ पहुंच पाए हैं।  
उल्लेखनीय है कि प्रतापपुर पुलिस ग्राम टुकूडांड की ओर से आने-जाने वाली वाहनों को चेक कर रही थी, इसी दौरान टीपर, पिकअप में कोयला लोड कर रहे वाहन चालक पुलिस को देखकर कुछ दूरी पर सड़क के किनारे गाड़ी को खड़ा कर भागने लगे। पुलिस भागने वाले व्यक्तियों का पीछा की परंतु सभी वाहन चालक जंगल के रास्ते से भागने में सफल हो गए। ऐसे में पुलिस ने लावारिस हाल में मिली वाहनों को जब्त किया था। वाहनों की जब्ती के तीन-चार दिन बीतने के बाद भी कोयला चोरी में पकड़े गए वाहनों के स्वामी अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। इसे पुलिस की कैसी सफलता मानी जाए, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। बलरामपुर व सूरजपुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में अवैध कोयला खदानों से लाखों का कोयला हर दिन चोरी हो रहा है। बरसात  के समय में ईंट भ_ा बंद होने के बाद भी आखिर भारी मात्रा में कोयला कहां जा रहा है, इसका भी कोई जवाब नहीं मिल पाया है।
लाखों का रोजाना का कारोबार
सूत्रों का कहना है कि महान 2 व 3 के आसपास अवैध कोयला खदानों से रोजाना 30-40 छोटी-बड़ी गाडिय़ो से कोयला लोड कर परिवहन किया जाता है। तस्कर इस कोयले को ग्रामीणों से दो ढाई रुपये किलो खरीदते हैं और ईट भ_ा व कोल डिपो में तीन-चार रुपये किलो बेच देते हैं। यही कोयला कोल डिपो में जाने के बाद 5 से 6 रुपये किलो हो जाता है। इस अनुमान से रोजाना लाखों रुपये के अवैध कोयले का कारोबार होता है। महीने में करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा होने के बाद भी अवैध कोयले की तस्करी पर विराम नहीं लग पा रहा है।

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