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छत्तीसगढ़

अंबिकापुर-रेणुकूट रेलवे लाइन विस्तार की ओर टकटकी लगाए लोगों को ठेका कंपनी ने दिया ऐसा झटका भटगांव-रेणुकूट की जगह उस भटगांव-रेणुकूट रेलमार्ग का कर दिया सर्वे

अंबिकापुर। अंबिकापुर से रेणुकूट तक रेलवे लाइन का विस्तार होने की आस लगाए संभाग के लाखों लोगों की उम्मीदों पर रेलवे लाइन की सर्वे कंपनी ने पानी फेर दिया है। स्वयं के लाभ के लिए ऐसा सर्वे किया गया, जिससे रेल लाइन का विस्तार दिवास्वप्न लग रहा है। सर्वे कंपनी ने भटगांव से रेणुकूट रेल मार्ग के लिए सूरजपुर जिले के भटगांव की जगह बलौदा बाजार जिले में स्थित भटगांव से 400 किलोमीटर से ज्यादा का सर्वे करने के बाद इसकी रिपोर्ट रेलवे को सौंप दी है। इसका पर्दाफास सूचना के अधिकार के तहत सामने आए दस्तावेज से हुआ है। सामने आया है कि इसमें घोटाले की नीयत रखकर ठेका कंपनी ने पूर्व के सर्वे के आधे दस्तावेजों की कॉपी कर उसे जमा किया और करोड़ों रुपये डकार लिए। ठेका कंपनी ने रेल लाइन की लागत पांच हजार 592 करोड़ रुपये बताई थी। ठेका कंपनी ने कैसे पूर्व के सर्वे रिपोर्ट के कागजात को कॉपी पेस्ट करके कैसे करोड़ों रुपये हजम कर लिए।
रेलवे द्वारा फिर से अंबिकापुर से रेणकूट रेल लाइन के सर्वे हेतु टेंडर जारी किया गया है। इसे लेकर क्षेत्र के लोगों में एक बार फिर से अंबिकापुर से रेल लाइन विस्तार की उम्मीद जगी है। यह कोई पहली बार नहीं है जब रेलवे ने अंबिकापुर से रेणुकूट रेल लाइन के सर्वे का टेंडर जारी किया हो। पूर्व में भी तीन बार इस लाइन के लिए सर्वे कराया जा चुका है। वर्ष 2014 में कोरबा से अंबिकापुर-रेणुकूट रेललाइन के लिए सर्वे कराया गया था, तब इस रेल लाइन की लंबाई करीब 350 किलोमीटर थी। इससे रेलवे को केवल 3.56 प्रतिशत राशि प्रतिवर्ष आय के रूप में प्राप्त होने का अनुमान था। कहने का तात्पर्य है इस रेल लाइन का निर्माण करने में जितनी राशि लगती उससे केवल 3.56 प्रतिशत राशि ही रेलवे को प्राप्त होती, जिससे इस मार्ग की लागत निकालने में रेलवे को करीब 33 वर्ष लग जाते। कुछ समय बाद ही भटगांव-प्रतापपुर-वाड्रफनगर-रेणुकूट मार्ग का सर्वे करने के लिए टेंडर जारी किया गया। परंतु ठेका कंपनी ने सूरजपुर जिले के भटगांव के बजाय बलौदाबाजार जिले में भटगांव से सर्वे का कार्य बता इस रेल लाइन को 405 किलोमीटर बना दिया और प्रतिवर्ष की आय को कम बताया। स्वयं के लाभ के लिए ठेका कंपनी ने सरगुजांचल के लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ तो किया ही, विकास के मार्ग को भी बाधित कर दिया। सूचना के अधिकार में जब ठेका कंपनी के कारनामे का पर्दाफास हुआ तो ठेका कंपनी ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि टेंडर में किस भटगांव से सर्वे करना है, अस्पष्ट था। बता दें कि अंबिकापुर से रेणुकूट तक के लिए पूर्व में भी एक बार सर्वे हो चुका है। इसमें अंबिकापुर से रेणुकूट रेलमार्ग का रेट ऑफ रिटर्न सात से आठ प्रतिशत अनुमानित था। इस रेल मार्ग को कोल ब्लाक वाले सिंगरौली मध्यप्रदेश से जोडने का भी सुझाव दिया गया था। इससे इस रेल मार्ग पर रेट ऑफ रिटर्न करीब 14.4 प्रतिशत हो जाता और पूरे रेल मार्ग निर्माण पर लगने वाली कुल लागत को रेलवे मात्र सात वर्षों में वसूल लेता।
रेलवे बोर्ड से की गई थी शिकायत
सरगुजा रेल संघर्ष समिति के सदस्य ने रेलवे बोर्ड से इसकी शिकायत की थी, इसमें उल्लेख किया गया था कि भटगांव-प्रतापपुर-वाड्रफनगर होते हुए रेणुकूट रेल मार्ग सर्वेक्षण में गड़बड़ी हुई है। रेलवे मंत्रालय द्वारा उत्तर प्रदेश के रेणुकूट व छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग को जोडऩे भटगांव-प्रतापपुर-वाड्रफनगर होते हुए रेणुकूट रेल मार्ग का सर्वेक्षण सुनिश्चित किया गया था, जिसके लिए बीते तीन वर्षों के दौरान अनुदान की मांगों में बजट आबंटित किया गया।

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