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छत्तीसगढ़

केंवरा पंचायत को पांच वर्ष में मिले एक करोड़, धरातल पर विकास शून्य फर्जी बिल के सहारे जमकर भ्रष्टाचार का जांच में हो सकता है पर्दाफास


प्रतापपुर। सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत केंवरा जनसंख्या के हिसाब से सबसे बड़ी पंचायत है, जिसे शासन से 14वें वित्त के तहत पांच वर्षों में एक करोड़ रुपये प्राप्त हुआ, लेकिन इस राशि का बंदरबांट ऐसा किया गया कि विकास कार्यों का धरातल पर पता ही नहीं चला। कई  कार्य मुरम पाटने के बिना कार्य योजना के कर खर्च दर्शा दिया गया। अगर बारीकी से जांच हो तो पंचायत में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की पोल खुल सकती है। सूत्रों का कहना है सरपंच पंचायती राज अधिनियम को किनारे रखकर अपने नियम से पंचायत का संचालन करते रहे। पंचायत में व्यय करने के लिए जो राशि मिली वो इनके लिए चारागाह साबित हुई। इन पर अंकुश लगाने की पहल नहीं होने से फर्जी बिल लगाकर जमकर भ्रष्टाचार किया गया।
गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए पंचायती राज का गठन किया गया ताकि गांव की छोटी-बड़ी कमियों को ग्रामीणों के बीच सामंजस्य बनाकर निपटा लिया जाए। पंचायत के सरपंच-सचिव, ग्रामवासियों को दिए गए अधिकार का विकासखंड के पंचायतों में किस हद तक सदुपयोग किया गया, यह ग्राम पंचायत केंवरा में देखने को मिल रहा है। पंचायत के खाते में मूलभूत, 14वें-15वें वित्त व टैक्स वसूली की राशि आती है, जिसे पंचायत में आवश्यकता अनुसार खर्च किया जाता है, लेकिन जनपद पंचायत प्रतापपुर में इस योजना की राशि से विकास के बजाए फर्जी बिल लगा सरकार व जनता के पैसे का दुरूपयोग किया जा रहा है, जिस पर आला अफसरों की नजर न पडऩा मिलीभगत दर्शाता है।
फर्जी बिलों से भुगतान
पंचायत में फर्जी वेंडर के खाते में पंचायत द्वारा भुगतान करने जैसी बातें सामने आ रही है। ऐसे फर्म जो सिर्फ कागजों में संचालित हो रहे हैं, उनके द्वारा निर्माण सामग्री की सप्लाई की जा रही है। आरोप यह भी है कि फर्जीवाड़े में जनपद पंचायत के जिम्मेदारों की भूमिका संदिग्ध है। ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव ने वेंडर के माध्यम से खुद को लाभ पहुंचाया है, वहीं तथाकथित फर्म के संचालक ने वाणिज्य कर विभाग की आंखों में धूल झोंकने का काम किया है।
रेवड़ी की तरह बंट रहाकमीशन-
पंचायतों में जीएसटी लागू होने के बाद फर्जीवाड़ा खत्म होने की उम्मीद थी लेकिन पंचायत के सरपंच, सचिव व रोजगार सहायक ने खुद या स्वजनों के नाम जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराना शुरू कर दिया। फर्जी फर्म जिनका अस्तित्व नहीं है, वे कागजों में मनमाने दर पर सप्लाई करने लगे। कुछ पंचायतों में ऐसे बिल लगने की बातें सामने आ रही हैं, जहां किसी प्रकार की खरीदी नहीं की गई है। जिले के कलेक्टर से पंचायतों में हो रहे भ्रष्टाचार की जांच करा दोषियों का पर्दाफास करने का आग्रह क्षेत्र के लोगों ने किया

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