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छत्तीसगढ़

बालकों की सुकुमार अवस्था का दुरूपयोग रोकने का संविधान में है प्रावधान महामाया चौक में हुआ विधिक सहायता शिविर का आयोजन


अंबिकापुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंबिकापुर राकेश बिहारी घोरे के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अमित जिन्दल के मार्गदर्शन में पीएलवी मोना सोनी द्वारा आठ जुलाई को महामाया चौक में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर में लोगों को बताया गया कि बच्चे राष्ट्र के भविष्य हैं। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे को किसी कारखाने, खान या खतरनाक काम में नहीं लगाए जाने का प्रावधान है तथा अनुच्छेद 39 ई में बालकों की सुकुमार अवस्था का दुरूपयोग रोकने का प्रावधान है। अनुच्छेद 39 एफ में बालकों को स्वस्थ विकास के अवसर और सुविधाएं देने का प्रावधान है। संविधान की इन्ही भावनाओं को ध्यान रखते हुए नालसा (बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं और उनके संरक्षण के लिए विधिक सेवाएं) योजना, 2015 लाई गई, जिसमें बालकों के सर्वोत्तम हित, बाल कल्याण की बात की गई तथा किशोरों को विधिक सेवा के माध्यम से अधिवक्ता दिए जाने का प्रावधान रखा गया। बच्चों के अधिकारों के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार का भी प्रावधान है। पीएलवी मोना सोनी ने बताया कि किसी भी बालक से तीन घंटे से ज्यादा लगातार काम नहीं कराया जा सकता। इस अवधि के बाद उसे आधे घंटे के लिए आराम का समय दिया जाएगा। किसी भी बालक से रात्रि सात बजे से प्रात: आठ बजे के मध्य कार्य कराया जाना अधिनियम में मना किया गया है और बालक को एक दिन का साप्ताहिक अवकाश देना आवश्यक है।

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