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छत्तीसगढ़

बालकों की सुकुमार अवस्था का दुरुपयोग रोकने है कानूनी प्रावधान-अमित जिन्दल बाल अधिकारों के संबंध में जागरूकता लाने सेमीनार व विधिक सहायता शिविर का आयोजन


अंबिकापुर। बाल अधिकारों के संबंध में जागरूकता लाने सेमीनार व विधिक सहायता शिविर का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अंबिकापुर के अध्यक्ष तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश बिहारी घोरे के निर्देश पर प्राधिकरण के सचिव अमित जिन्दल द्वारा न्याय सदन भवन, न्यायालय परिसर में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, विशेष किशोर पुलिस यूनिट, किशोर न्याय बोर्ड एवं बाल कल्याण समिति अंबिकापुर के सदस्यों, काउंसलर, पैनल अधिवक्ता, पैरालीगल वालेंटियर, विधि छात्रों के साथ सेमीनार, वर्कशाप, कान्फ्रेंस, प्रशिक्षण, ओरियंटेशन व सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम आयोजित किए गए।
प्राधिकरण के सचिव अमित जिन्दल ने कहा कि बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 24 में 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे को किसी कारखाने, खान, खतरनाक काम में नहीं लगाने का प्रावधान है। अनुच्छेद 39-ई में बालकों की सुकुमार अवस्था का दुरुपयोग रोकने का प्रावधान है। अनुच्छेद 39-एफ में बालकों को स्वस्थ विकास के अवसर और सुविधाएं देने का प्रावधान है तथा संविधान की इन्हीं भावनाओं को ध्यान रखते हुए नालसा (बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं और उनके संरक्षण लिए विधिक सेवाएं) योजना, 2015 लाई गई, जिसमें बालकों के सर्वोत्तम हित, बाल कल्याण की बात की गई। उन्होंने बताया कि किशोरों को विधिक सेवा के माध्यम से अधिवक्ता देने का प्रावधान है तथा बच्चों के अधिकारों के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार का प्रावधान है। बाल श्रम प्रतिषेध अधिनियम के अनुसार किसी भी बालक से तीन घंटे से ज्यादा लगातार काम नहीं कराया जा सकता है, इसके बाद उसे आधे घंटे के लिए आराम के लिए समय दिया जाएगा। किसी भी बालक से रात्रि सात बजे से प्रात: आठ बजे के मध्य कार्य कराने से अधिनियम में मना किया गया है। बालक को एक दिन का साप्ताहिक अवकाश देना आवश्यक है। उन्होंने बताया बाल श्रम की समस्या को खत्म करने एवं संविधान के जनादेश की प्रभावोत्पादकता हेतु उच्चतम न्यायालय ने भी एमसी मेहता बनाम तमिलनाडु राज्य 1996 में निर्देश दिया कि नियोजक को बालश्रम (निषेध एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1986 के उल्लंघन में 14 वर्ष से कम के बालक को खतरनाक कार्य में लगाने पर 20 हजार रुपये मुआवजा देना है तथा समुचित सरकार को ऐसे प्रत्येक बच्चे, जो खतरनाक काम में कार्यरत हंै, को पांच हजार रुपये अनुदान के रूप में देना होगा। उक्त रकम 25 हजार को कोष में जमा करना होगा जो बालश्रम-पुनर्वास सह कल्याण कोष के रूप में बच्चों के पुनर्वास में प्रयोग होगी। कार्यक्रम में डीएसपी कश्यप, डॉ.मीरा शुक्ला तथा अन्य वक्ताओं ने भी विचार रखे।

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