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छत्तीसगढ़

सरगुजा में अगले पांच दिनों में साफ से सामान्यत: घने बादल छाए रहने व वर्षा नहीं होने की संभावना


अंबिकापुर। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के नोडल अधिकारी एवं वैज्ञानिक डॉ.रंजित कुमार ने बताया कि ग्रामीण कृषि मौसम सेवा एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग रायपुर द्वारा आगामी एक से पांच जून तक के प्राप्त मौसम पूर्वानुमान आंकड़ों के अनुसार अगले पांच दिनों में छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिला क्षेत्र के आसमान में साफ से सामान्यत: घने बादल छाए रह सकते हंै, वर्षा होने की संभावना नहीं हैं। जिले में अधिकतम तापमान लगभग 39-42 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है एवं न्यूनतम तापमान 25-26 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। सुबह हवा में 70-75 प्रतिशत एवं दोपहर को 20 से 35 प्रतिशत नमी रहने की संभावना है। आने वाले दिनों में हवा मुख्यत: उत्तर-पश्चिम दिशा से चलने की संभावना है, इसकी गति लगभग 4 से 8 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की संभावना है।
किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की सलाह-
कृषि मौसम वैज्ञानिक यमलेश कुमार निषाद ने आगामी समय के ज्ञात आंकड़ों के अनुसार बताया कि आने वाले दिनों में सामान्यत: घने बादल छाए रहने, उच्च तापमान, उच्च आद्र्रता, उमस जैसी स्थिति की संभावना को ध्यान में रखते हुए किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि काटी गई धान, ग्रीष्मकालीन दलहन, तिलहन  फसल को सुरक्षित स्थानों में रखें, गन्ना एवं उद्यानिकी फसलों में क्रांतिक अवस्था के आधार पर आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। खरीफ फसल की बोनी के पूर्व खेतों में लगने वाले कृषि यत्रं एवं उपकरणों की व्यवस्था कर आवश्यक मरम्मत कर लेवें। खेत की गहरी जुताई करें, जिससे मृदा जनित खरपतवार, बीमारी एवं कीड़ों के अंडे नष्ट हो जाएं। सलाह दी गई है कि खरीफ में जिन फसलों की बुवाई करनी हो, उनकी उन्नतशील जातियों के बीजों की व्यवस्था जरुर कर लेवें। खेतों तक अच्छी सड़ी गोबर खाद को पहुंचाना प्रारंभ करें। खेतों के मेढ़ों की मरम्मत करें।
मवेशियों में गलघोंटू व लंगड़ी रोग की संभावना  
मौसम में बढ़ते तापमान एवं उच्च आद्र्रता को देखते हुए मवेशियों में गलघोटू एवं लंगड़ी रोग के प्रसार होने की संभावना है। ऐसे में पशु चिकित्सक से संपर्क कर मवेशियों को टीकाकरण करवाने की सलाह दी गई है। यदि पशुओं को लू लग जाए तो छायादार जगह ले जाकर गीले कपड़े से पूरे शरीर को बार-बार पोछने कहा गया है। पशुओं को निर्जलीकरण से बचाने के लिए एक लीटर पानी में 4-5 चम्मच शक्कर एवं एक चौथाई चम्मच नमक का घोल बनाकर हर आधे-एक घंटे में पिलाने तथा पशु चिकित्सक से संपर्क करने कहा गया है। मछली पालकों को सलाह दी गई है कि जल निकास मार्ग को साफ करें। अनावश्यक जलीय खरपतवारों का नियंत्रण करें एवं मेढ़ों को दुरुस्त करें।  
कीट नियंत्रण व निंदाई-गुड़ाई करें किसान
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.जीपी पैकरा, कीट विज्ञान विभाग के अनुसार कद्दू के लाल कीट नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोरपिड का स्प्रे (8 मि.ली. प्रति स्प्रेयर) करें। टमाटर, बैगन, मिर्च, भिंडी एवं अन्य सब्जी वाली फसल में निंदाई गुडाई करें एवं आवश्कतानुसार सिंचाई कर नत्रजन उर्वरक की मात्रा देवें। वातावरण में तापमान को देखते हुए सिंचाई की दर बढ़ा देवें। उद्यानिकी फसल मुख्यत: फल उद्यान (बाग) लगाने के इच्छुक किसान गड्डे (1&1&1मीटर) तैयार कर उपचार हेतु खुले रखकर धूप दिखाएंं, साथ ही फल वृक्षों के किस्मों का चयन कर पौधे लाने की व्यवस्था करें। वैज्ञानिक डॉ सचिन जायसवाल, कीट विज्ञान विभाग के अनुसार साफ मौसम होने पर कीटनाशक, रोग नाशक या उर्वरकों की अनुसंशित मात्रा का भुरकाव या छिड़काव किसान कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त मधुमक्खी पालकों को मधुमक्खी के लिए कृत्रिम भोजन (1:1 शक्कर और पानी) का घोल बनाकर भोजन पात्र में आवाश्यक्तानुसार दें। समय-समय पर मधुमक्खी पेटी की साफ सफाई 10:15 दिन के अंतराल पर करें साथ ही मोमी कीट दिखाई देने पर उसकी सफाई करें।  मिट्टी के बने बर्तन, प्लास्टिक की कटोरी में साफ एवं ताजा पानी दें। दिखाई देने पर ततैया का नियंत्रण करें।

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