अंबिकापुर। नंगे पांव सत्याग्रह के सामाजिक कार्यकर्ताओं के तीन सदस्यीय समूह ने हसदेव क्षेत्र के हरिहरपुर, फतेहपुर, घाटबर्रा, साल्ही व परसा गाम्रों का भ्रमण कर सूचना संकलन की गतिविधि की। सूचना संकलन में उन्होंने पाया कि प्रत्येक गांव में दो दल बन गए हैं। एक अडानी कंपनी का तो दूसरा हसदेव का, इन गांवों के लोग आपस में बंट चुके हैं। सामाजिक व पारिवारिक समरसता समाप्त हो चुकी है। दोनों दलों में बंटे हुए गांव के लोगों में भय का माहौल है। इन गांवों के मूल निवासी जो शासकीय सेवा में हैं, वे अपनी नौकरी को लेकर भयभीत हैं कि कब उन्हें कौन सा नोटिस मिल जाए। इन गांवों के निवासियों का महत्वपूर्ण मानव अधिकार, अभिव्यक्ति का अधिकार, भी अडानी व हसदेव द्वंद्व के कारण छिन चुका है। नंगे पांव सत्याग्रह द्वारा संभाग प्रशासन, हसदेव समूह, अडानी कंपनी व स्थानीय राजनैतिक दलों को परिपत्र भेजकर द्वंद्व की समाप्ति व समरसता बहाली की मांग की जा रही है। नंगे पांव सत्याग्रह के संयोजक राजेश सिंह सिसोदिया ने बताया कि इस क्षेत्र में उनके संगठन की सक्रियता नहीं रही लेकिन वर्ष 2013 में स्थानीय राजनैतिक रसूखदारों द्वारा छले गए केते परसा निवासी भज्जू राम गोंड़ का प्रकरण सत्याग्रह द्वारा मजबूती से सक्षम अधिकारियों के समक्ष उठाया गया था। उक्त प्रकरण में दोषियों के ऊपर कार्रवाई भी हुई थी।
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