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छत्तीसगढ़

नौतपा के तीसरे दिन तेज हवाओं के साथ हुई तेज व मध्यम वर्षा वर्ष 2012 में नौतपा के दौरान औसत तापमान दस वर्षीय अवधि में उच्चतम


अंबिकापुर। नौतपा की अवधि अमूमन 25 मई से 2 जून के लगभग की होती है। सामान्य जन अवधारणा है कि इस अवधि में वर्षा न हो तो वह आने वाले मानसून के लिए अनुकूल होता है। नौतपा में जितनी अधिक जमीन तपे, उतनी ही अच्छी वर्षा होती है। इधर नवतपा के तीसरे दिन शुक्रवार को अंबिकापुर में तेज हवाओं के साथ तेज व मध्यम वर्षा हुई। अंबिकापुर के विगत 10 वर्षों के आंकड़ों से नौतपा के दौरान लघु क्षेत्र के तापमान से कोई विशेष संबंध परिलक्षित नहीं होता है। विगत दस वर्षों की मानसूनी वर्षा का औसत 1091.2 मिमी है, जिनमें से वर्ष 2012, 2016 और 2017 के वर्षों में ही इस अवधि की औसत से अधिक वर्षा दर्ज हुई थी। वर्ष 2012 में नौतपा के दौरान औसत तापमान दस वर्षीय अवधि में उच्चतम था, जो नौतपा की अवधारणा के अनुकूल था परंतु वर्ष 2016 और 2017 में इस अवधि की तपिश के तेवर में गिरावट के बावजूद वर्षा की मात्रा में भारी उछाल रहा।
मौसम विभाग के एएम भट्ट नौतपा के दौरान बारिश की बन रही स्थिति को मौसमी आंकड़ों के तराजू पर परखते हुए कहते हैं कि मानसून एक वृहत भूगोल की वृहद प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो हिंद महासागर, अरब सागर और खाड़ी की ऊष्मा के साथ समग्र भारत विशेष कर उत्तर भारत के तापमान से प्रभावित होती है। किसी सीमित क्षेत्र के मौसमी आंकड़ों से इसे परिभाषित नहीं किया जा सकता। इस वर्ष भी नौतपा का आगाज वर्षा और तापमान में गिरावट के साथ हुआ है, फिर भी मानसून के अनुकूल रहने की उम्मीद है। पिछले वर्ष 2021 में नौतपा अवधि का औसत अधिकतम और न्यूनतम तापमान पिछले 10 वर्षों में सबसे कम क्रमश: 32.9 डिग्री और 23.4 डिग्री सेल्सियस था। इस अवधि में 49.2 मिमी सर्वाधिक वर्षा भी हुई थी। नौतपा के सबसे ठंडे रहने के बावजूद पिछले वर्ष मानसून में कुल 1009.3 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य के अनुरूप थी। वर्ष 1969 से 2020 के 52 वर्षों में नौतपा की अवधि के औसत अधिकतम तापमान और उस वर्ष नौतपा की अवधि में हुई वर्षा की मात्रा की तुलना संबंधित वर्ष की कुल मानसूनी वर्षा के आंकड़ों से करने पर नौतपा की अवधि में इन 52 वर्षों में औसत अधिकतम तापमान 43.9 डिग्री सेल्सियस वर्ष 1998 में दर्ज किया गया। उस वर्ष इस अवधि में कोई वर्षा नहीं हुई थी, जबकि एक जून से 30 सितंबर के मानसून की अवधि में वर्ष 1998 के वर्ष में महज 1087.7 मिमी वर्षा हुई थी। दूसरे अधिकतम औसत तापमान वाला वर्ष था 2012, जिसमें नौतपा अवधि में औसत तापमान 43.0 डिग्री सेल्सियस और वर्षा शून्य थी। इस वर्ष कुल मानसूनी वर्षा 1181.8 मिमी हुई थी। 42.6 डिग्री सेल्सियस के औसत अधिकतम तापमान के साथ 1988 का वर्ष तीसरा सबसे गर्म नौतपा का वर्ष था, जिसमें 15.0 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। इस वर्ष 1201.7 मिमी की अच्छी वर्षा भी हुई थी। चौथा सबसे गर्म नौतपा वर्ष शून्य वर्षा के साथ 42.0 डिग्री सेल्सियस के औसत तापमान के साथ वर्ष 2003 का था। इस वर्ष मानसून काल में 1240.6 मिमी की अच्छी वर्षा हुई थी। पांचवें पायदान पर शून्य वर्षा के साथ 2005 आता है, जिस वर्ष इस अवधि में औसत अधिकतम तापमान 42.0 डिग्री सेल्सियस था और कुल वर्षा महज 949.7 मिमी हुई थी। 42.0 डिग्री के औसत तापमान वाला वर्ष 2010 भी रहा है। इस वर्ष नौतपा अवधि में 5.4 मिमी और मानसून में कुल 649.7 मिमी की अल्प वर्षा हुई थी। सन 1996 का वर्ष इस कड़ी में छठवें पायदान पर सर्वाधिक गर्म नौतपा वाला वर्ष था। औसत तापमान 41.9 डिग्री सेल्सियस और वर्षा 23.7 मिमी मानसून काल में इस वर्ष में 1279.3 मिमी की शानदार वर्षा नापी गई थी। इसी तापमान श्रेणी अर्थात 41.9 डिग्री सेल्सियस के औसत तापमान और शून्य वर्षा वाला नौतपा वर्ष 2015 का था, जिस वर्ष मानसून में कुल 997.9 मिमी ही वर्षा हो पाई थी। वर्ष 1972 में औसत अधिकतम तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस और नौतपा में शून्य वर्षा के साथ मानसून में 1188.6 मिमी की वर्षा हुई थी।
आगे के कुछ और वर्ष-
वर्ष औसत तापमान नौतपा में वर्षा  मानसून में कुल वर्षा
1995      41.5 0.0 1151.7
1994      41.3 3.7    2051.6 (रिकार्ड)
1969      40.9 13.2 1193.3
1991      40.8 0.6 1660.7
इन आंकड़ों में 1994 का वर्ष अब तक मानसून अवधि में अंबिकापुर में सर्वाधिक वर्षा के होने का रिकार्ड वाला वर्ष है। मानसून में न्यूनतम वर्षा वाला वर्ष 2009 है। इस वर्ष केवल 603.2 मिमी वर्षा हुई थी, जबकि इस वर्ष के नौतपा अवधि का औसत तापमान 38.0 डिग्री सेल्सियस और इस अवधि में चार दिनों में 8.6 मिमी वर्षा हुई थी। पिछले 52 वर्षों के इतिहास में 34 वर्षों में नौतपा की अवधि में वर्षा दर्ज की गई, जिनमें मानसून के दौरान 1000 मिमी से अधिक वर्षा हुई है। नौतपा की अवधि में सबसे अधिक 60.8 मिमी की वर्षा सन 1971 में हुई थी, जबकि इस वर्ष मानसून में 1773.5 मिमी की अति वर्षा दर्ज की गई थी। 1999 में भी नौतपा अवधि में 59.7 मिमी वर्षा होने तथा औसत तापमान 37.8 डिग्री सेल्सियस होने के बाद भी मानसून काल में 1243.9 मिमी की भरपूर वर्षा हुई थी। परंतु वर्ष 2020 में नौतपा अवधि में 40.7 मिमी की वर्षा के साथ औसत तापमान 38.2 डिग्री सेल्सियस था जो नौतपा के लोक प्रचलित मानदंड को कुछ हद तक सही साबित करता हुआ मानसून को महज 985.6 मिमी की ही वर्षा तक रोके रखा था। इन आंकड़ों से प्रतीत होता है कि नौतपा के दौरान स्थानीय तापमान के उच्च होने की जगह समुद्री सतहों का तापमान उच्च होना आवश्यक है। हालांकि यह विश्लेषण सिर्फ अंबिकापुर के उपलब्ध आंकड़ो के आलोक में किया गया है, जिससे किसी लोक प्रचलित अवधारणा को झुठलाया या पूरी तरह स्वीकारा नहीं जा सकता। इस तरह की अवधारणाओं के लिए किसी बड़े क्षेत्र के आंकड़ों की उपलब्धता और विश्लेषित निष्कर्ष से ही तथ्यात्मक व पुष्टिकारक निष्कर्ष निकल सकते हैं।
ऐसे बनती है जलवर्षा की दशा-दिशा अनुकूल
नौतपा सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में भ्रमण करने का शुरुआती नौ दिनों की अवधि होता है, जिसमें सूर्य की सीधी और तीखी गर्म किरणें भूमध्य रेखा के आसपास के भूमंडल को गर्म करके भारी मात्रा में संवहनीय तरंगों का निर्माण करती हैं। महासागरीय जलराशि में वाष्पन की दर में वृद्धि होने से मानसूनी तरंगों का जन्म होता है और आने वाले मानसून अवधि में जलवर्षा की दशा-दिशा को अनुकूल बनाने में मदद करता है।
द्रोणिका की सक्रियता का प्रभाव
वर्तमान में पूर्वी बिहार से समुद्र तटीय उत्तरी आंध्रप्रदेश तक एक द्रोणिका सक्रिय है, जिसके कारण इसके दायरे में आने वाले राज्यों विशेष कर बिहार, झारखंड, बंगाल, ओडि़सा, सिक्किम के मौसम में प्रभाव अधिक है। इनसे लगे हुए छात्तीसगढ़ के क्षेत्रों पर भी कम से कम अगले दिन तक प्रभाव रहने की संभावना है।

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