अंबिकापुर। राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र में 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में संबलपुर की महिला मधुमक्खी पालन के कृषक को अखिल भारतीय मधुमक्खी पालन एवं परागण सहायक कीट अनुसंधान परियोजना अंबिकापुर द्वारा इस दिवस पर प्रशिक्षण दिया गया। मुख्य अतिथि संस्था के अधिष्ठाता डॉ.पी.के.जायसवाल के मार्गदर्शन में कार्यक्रम संचालित किया गया, उन्होंने मधुमक्खी पालन को अधिक बढ़ावा देने के लिये प्रेरित किया साथ ही अधिक जहरीले कीटनाशकों का प्रयोग न करते हुए जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करने की सलाह दी। कार्यक्रम में डॉ.जीपी पैकरा ने मधुमक्खी दिवस क्यों मनाया जाता है और मधुमक्खी पालन के बारे में विस्तृत जानकारी दी। डॉ.पीके भगत ने मधुमक्खी के विभिन्न उत्पाद जैसे शहद, मोम, मधुविष, रायलजैली, पराग के बारे में विस्तृत जानकारी दी। डॉ.सचिन जायसवाल ने मधुमक्खियों में लगने वाले रोग व कीटों के बारे में बताया तथा उनकी रोकथाम की जानकारी दी। कार्यक्रम में कृषकों के अतिरिक्त 09 महिला स्वयं सहायता समूह के सदस्य भी उपस्थिति थे। महाविद्यालय के द्वारा प्रत्येक स्वयं सहायता समूह को एक-एक मधु पेटी एवं नकाब का वितरण किया गया। महिला कृषक समूह द्वारा बताया गया कि संबलपुर ग्राम गौठान का कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हुआ है। संबंधित विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई की जाने की मांग की गई है। महाविद्यालय द्वारा ग्राम गौठान महिला समूह को एक नग मधुमक्खी पेटी एवं नकाब नि:शुल्क प्रदाय किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय द्वारा उत्पादित लीची, सुगंधित मधुरस का ब्रांडिग कर विक्रय हेतु शुभारंभ अधिष्ठाता द्वारा किया गया। कार्यक्रम में संस्था के डॉ.एसआर दुबोलिया, डॉ.रंजीत कुमार, यमलेश निषाद सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।
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