अंबिकापुर। मूली पड़हा उरांव समाज द्वारा शुक्रवार को सरहुल खद्दी पर्व परंपरागत तरीके से प्रकृति की पूजा करके मनाया गया। बाजे-गाजे के साथ शहर में शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें समाज के महिला-पुरूष व बच्चे नाचते-गाते चल रहे थे। शंकरघाट स्थित सरना स्थल पर प्रकृति पूजा का अनुष्ठान परंपरानुसार हुआ। समाज के लोगों को गौरवशाली इतिहास से अवगत कराते हुए सभ्यता, संस्कृति व परंपरा से जुड़े रहने का आह्वान किया गया। प्रकृति पूजा के इस बड़े आयोजन में समाज के सभी वर्ग के लोगों ने श्रद्घाभाव से सहभागिता दर्ज कराई। इसके पश्चात सायं छह बजे से धर्ममंडा पादा पड़हा भवन में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
प्रतिवर्ष आदिवासी समाज द्वारा सरहुल पर्व सरगुजा अंचल में धूमधाम से मनाया जाता है। शुक्रवार को हर्षोल्लास के साथ मिलजुल कर सौहार्द्रपूर्ण माहौल में मनाया गया। शंकरघाट स्थित सरना स्थल पर प्रकृति पूजा का अनुष्ठान परंपरानुसार हुआ। इसके बाद शोभायात्रा मूली पड़हा अंबिकापुर मुख्यालय धरममंडा, पटेल पारा से प्रारंभ होकर बनारस रोड़, अंबेडकर चौक, गांधी चौक, घड़ी चौक, संगम चौक, महामाया चौक, गुरुनानक चौक, बंगाली चौक, संजय पार्क होते हुए सरना स्थल शंकर घाट में संपन्न हुई। यहां सामूहिक पूजन व धर्म सभा के साथ सामूहिक भोज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सरहुल पूजा के माध्यम से धरती की उर्वरा शक्ति को और बढ़ाए जाने की कामना की जाती है। इस अवसर पर मूली पड़हा समाज के मंगल उरांव बेल, उमेश भगत देवान, राजेश एक्का उप देवान, संजीव भगत रकम उरबस, दिलीप एक्का उप रकम उर्बस, मानकेश्वर बईगा, बालमनी प्रधान पंच प्रदीप भगत पंच और वरिष्ठ सामाजिक जनों में सरोज उरांव, उमाशंकर खलखो, जगना राम प्रधान, सागर तिर्की, टेकराम भगत, लक्ष्मी भगत, अनीता तिर्की, राजी पड़हा भारत के रकम उर्बस रामनाथ भगत सहित अन्य कार्यकर्ता नमना उरांव, टेकराम, विनय निकुंज, सागर तिर्की, राकेश राय, राकेश तिर्की, अखिलेश तिर्की शामिल रहे।
प्रकृति की पूजा कर परंपरागत तरीके से मनाया गया सरहुल पर्व शहर में निकली शोभायात्रा में शामिल महिला-पुरूष शहर भ्रमण के बाद सरना स्थल पहुंचे

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