अंबिकापुर। महंगाई भत्ता संघर्ष मोर्चा के बैनर तले सोमवार को जिले के हजारों कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश लेकर आंदोलन की शुरुआत कर दी है। कर्मचारी संगठन सरकार से आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। प्रांतीय निकाय द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार आगामी 13 अप्रैल तक तीन दिवसीय सामूहिक व आकस्मिक अवकाश लेकर कर्मचारी धरना-प्रदर्शन की रणनीति के तहत सरगुजा जिले में भी बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल हुए। संघर्ष मोर्चा के द्वारा लंबित 17 प्रतिशत महंगाई भत्ता तथा केंद्र के समान सातवें वेतनमान के अनुसार संशोधित गृह भाड़ा भत्ता प्रदान करने की मांग की गई है। कहा गया कि अविभाजित मध्य प्रदेश के होते हुए आज तक किसी भी सरकार ने कर्मचारियों का महंगाई भत्ता नहीं रोका था। महंगाई भत्ता कर्मचारियों का अधिकार है, यह बढ़ते हुए मंहगाई के अनुसार निर्धारित होता है। कर्मचारियों के महंगाई भत्ता का निर्धारण केंद्र की सरकार करती है और उसके अनुरूप राज्य सरकारें महंगाई भत्ता देती हैं किंतु छत्तीसगढ़ प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार विगत 28 माह से कर्मचारियों का महंगाई भत्ता रोक कर रखी हुई है। प्रदेश के लगभग चार लाख कर्मचारियों को औसतन प्रतिमाह आठ हजार रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे आज दिनांक तक सरकार को लगभग पांच करोड़ की बचत हो चुकी है। कर्मचारियों के इन पैसों का सरकार दुरुपयोग कर रही है। कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ता को रोककर यह सरकार अपने विधायकों, मंत्रियों, सरपंचों, विभिन्न निगम मंडल के अध्यक्ष, सदस्यों, जनप्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि कर रही है। उनके स्वेच्छा अनुदान की राशि में वृद्धि कर रही है, उनके वेतन भत्तों में 400 गुना तक वृद्धि कर रही है, जिससे सरकार पर अनावश्यक वित्तीय बोझ बढ़ रहा है, लेकिन जब कर्मचारियों को महंगाई भत्ता देने की बात आती है तो वे बगले झांकने लगते हैं। इन्हें अपने प्रदेश की वित्तीय स्थिति खराब दिखाई देने लगती है। प्रदेश के लाखों अधिकारी-कर्मचारी शासन की इस नीति से काफी आहत हैं और अब आर-पार की लड़ाई लडऩे के मूड में हैं। कर्मचारियों ने कहा कि तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश और आंदोलन के बाद भी यदि सरकार महंगाई भत्ता नहीं देती है तो अनिश्चितकालीन आंदोलन कर इस सरकार को सबक सिखाने की रणनीति बनाई जा रही है। धरना-प्रदर्शन, आंदोलन में अनुदान प्राप्त शिक्षक कर्मचारी संघ के कमल नयन त्रिपाठी, व्याख्याता संघ से डॉ.नीरज वर्मा, छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ से धनेश प्रताप सिंह, मेघनाथ साहू, अब्दुल जाकिर, महेंद्र सिंह, ऋषिकेश कुशवाहा, छत्तीसगढ़ कर्मचारी संघ के संभागीय अध्यक्ष सउद अंसारी, जिला अध्यक्ष इशरत जहां, तरुण आदित्य दुबे, वाहन चालक संघ से ज्योति ली, छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ से आरएन सिंह, आलोक कुशवाहा सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों के सैकड़ों अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।
मरीजों को निश्शुल्क दवा से होना पड़ा वंचित-
फोटो-2-बंद दवा काउंटर
कर्मचारियों के आंदोलन में जाने का असर राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल सहित जिले के अन्य अस्पतालों पर भी पड़ा। कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से कई काम-काज प्रभावित रहा। विशेष कर दवा वितरण कक्ष बंद रहने से मरीजों को निश्शुल्क दवा से वंचित होना पड़ा। जरूरतमंदों को दवा के लिए निजी मेडिकल स्टोर व रेडक्रॉस के जन औषधि केंद्र का चक्कर काटते देखा गया। कई मरीज कर्मचारियों के आंदोलन से अनजान थे, वे दवा की पर्ची लेकर रुपये हाथ में नहीं होने के कारण उल्टे पांव वापस लौट लिए। सरकारी एंबुलेंस के चालक भी इस हड़ताल में शामिल थे, जिस कारण एंबुलेंस के पहिए थमे रहे। संजीवनी 108, 102 व शव वाहन का पूर्ववत लाभ लोगों को मरीजों व शव के परिवहन के लिए मिला।
महंगाई भत्ता संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आंदोलन के आगाज से चरमराई व्यवस्था सैकड़ों कर्मचारियों ने स्वस्फूर्त आंदोलन में भाग लिया

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