दतिमा मोड़। सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड में पदस्थ वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को कूटरचित तरीके से हटवा इस पद पर पदस्थ हुए अशोक सोनवानी के व्यवहार से आदिवासी वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी खुद को आहत महसूस कर रहे हैं। कहना है कि राजनीतिक पकड़ होने के कारण वे अपनी पदस्थापना मनचाहे कार्यक्षेत्र में करवा लेते हैं। भैयाथान के सभी कृषि विस्तार अधिकारी एक सुर में इनके साथ कार्य नहीं करने हेतु हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंप चुके हैं। इन कर्मचारियों ने ज्ञापन में उल्लेखित किया है कि इन्हें नहीं हटाने की स्थिति में वे भूख हड़ताल करने बाध्य होंगे।
विदित हो कि हर बार खरीफ फसल के मौसम में बाहर की कंपनियां आकर शंंकर धान का बीज स्थानीय बीज विक्रेताओं के माध्यम से किसानों को बेचती हैं। किसान अपने खून-पसीने की कमाई से बीज खरीदते है परंतु कभी-कभी वह ठगी का शिकार भी हो जाते हैं। किसानों के इस दर्द को समझते हुए प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने विकासखंड भैयाथान में तीन खाद्य-बीज निरीक्षक, कृषि विकास अधिकारी नियुक्त किए थे ताकि किसान के मेहनत का पैसा ठगी की भेंट ना चढ़े, लेकिन शासन के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए भैयाथान से दो निरीक्षकों को अन्यत्र संलग्न कर दिया गया। वहीं सोनवानी को पूरे विकासखंड में जांच के लिए आदेशित करने की कृपा कर दी गई। यह छत्तीसगढ़ शासन के संसदीय सचिव का ब्लॉक मुख्यालय है। बतरा विधायक ग्राम है, वहां के निरीक्षक को भी अन्यत्र हटा दिया गया है।संसदीय सचिव की नाराजगी की चिंता भी विभाग के अधिकारियों को नहीं है।
वर्ग विशेष के कर्मचारी को मारने उठ पड़े अधिकारी-
साप्ताहिक बैठक में एक आदिवासी कर्मचारी को बिना किसी कारण के डांट-डपट करने के बाद सोनवानी मारने के लिए अपनी कुर्सी से उठ गए थे। वहां उपस्थित अन्य कर्मचारियों के हस्तक्षेप से अप्रिय स्थिति बनने से पहले विराम लग गया। बताया जा रहा है कि इनके प्रभार लेते ही कृषि विस्तार अधिकारियों के अन्यत्र विकासखंड में पदस्थापना हेतु आवेदन की होड़ सी लग गई है।
मामले को आयोग ने लिया संज्ञान में-
कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त अनुसचित जनजाजि आयोग के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने इस मामले को संज्ञान में लिया है व कठोर कार्रवाई काआश्वासन दिया है।
कृषि विभाग के कर्मचारी कहते है-
कृषि विभाग के कृषि विस्तार अधिकारी राम गोपाल राम व अन्य कुछ कर्मचारियों का आरोप है कि सोनवानी 20 वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत हैं। अपने कार्यकाल में उन्होंने कोई भी कार्य समय पर नहीं किया। आदिवासी वर्ग के कर्मचारियों व अधिकारियों को हमेशा अपमानित करना इनकी प्रवृत्ति है। संगठनात्मक पदों को हासिल कर आदिवासियों को अपमानित व शोषण का शिकार बनाने का कार्य उनके द्वारा किया जाता है।
जिला कार्यालय भी है मेहरबान-
आरोप है कि वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी सोनवानी जिला कार्यालय में एक कर्मचारी से सेटिंग कर तीन क्षेत्रों के निरीक्षक का आदेश प्राप्त कर लिए हैं। जिला कार्यालय में शासन के स्थानांतरण आदेश के बाद भी कुछ कर्मचारी मलाईदार शाखा में काबिज हैं। कार्यालय संयुक्त भवन में नहीं होने के कारण कर्मचारी समय से कार्यालय आना-जाना नहीं करते हैं। अगर कलेक्टर या किसी बड़े अधिकारी का आना हो तो इन्हें पूर्व में ही इसकी सूचना प्राप्त हो जाती है।
कृषि विकास अधिकारी अपमान की पराकाष्ठा पार कर रहे सहयोगी कर्मचारियों ने कहा-आदिवासी कर्मचारियों को अपमान व शोषण का शिकार बना रहे, अन्यत्र हटाने की मांग

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