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छत्तीसगढ़

पुजारी ने कहा-खुशहाली के लिए पूर्ण शराबबंदी से प्रसन्न होंगे ग्राम देवता, शराब छोड़ पूजार्चना में जुटे ग्रामीण शराब बनाने एवं बेचने पर 10 हजार, पीने पर 05 हजार रुपये देना होगा जुर्माना


अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराब बंदी को लेकर सरकार भले ही कोई निर्णय ले पाने की स्थिति में नहीं है, पांचवीं अनुसूची क्षेत्र का हवाला देकर आने वाले अवरोधों की बात की जाती हो, लेकिन सरगुजा संभाग के सूरजपुर जिले के एक गांव में पंचायती फरमान के बाद पूरी तरह से शराब बंदी कर दी गई है। शराब बनाने और पीने पर जुर्माना का प्रावधान सुनिश्चित किया गया है। इसके पीछे कारण ग्राम देवता की नाराजगी बताई जा रही है। पंचायत द्वारा ग्रामीणों की बैठक लेकर गांव में शराब बनाने व बेचने को लेकर अर्थदंड लगाने का फरमान जारी होने से शराब के शौकीनों की चिंता बढ़ गई है। ऐसे लोग शराब का सेवन करने के लिए आसपास के गांवों की ओर निकलने लगे हैं, इन्हें डर इस बात का भी रहता है कि अगर पंचायत के किसी जिम्मेदार ने नशे में देख लिया तो जुर्माना भरना होगा। इससे एक फायदा यह हुआ है कि शराब पीने के बाद हो-हल्ला करने वाले लोगों की तादाद शून्य हो गई है। गांव के लोग शराब से दूरी बना लिए हैं। इसके साथ ही ग्राम देव के स्थल पर पूजार्चना चल रही है।
हम बात कर रहे हैं सरगुजा संभाग के सूरजपुर जिले के जयनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंजनगर की, जो मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग से लगा गांव है। पंचायत के जनप्रतिनिधिय बताते है कि गांव के देवस्थल के पास चैत्र नवरात्रि के संबंध में बैठक बुलाई गई थी। बैठक में पंचायत के सरपंच, उपसरपंच व वार्ड पंचों की उपस्थित थे। इस दौरान ग्रामीण हुकुम राजवाड़े ने बताया कि वे यहां अच्छे से चैत्र नवरात्रि मनाते थे, लेकिन पिछले एक दशक से पूजा-पाठ नहीं होने के कारण गांव में लोग जो भी करते हैं, उससे किसी का भला नहीं हो रहा है। इसके बाद गांव के कुछ लोगों ने पूजा-पाठ अच्छे से नहीं होने की बात कही। इन बातों के बीच अंधविश्वास से भरी बातें भी सामने आने लगी। भोजराज का कहना था कि एक और गांव में ऐसी स्थिति थी, जिसमें अंबिकापुर के रिटायर्ड वन विभाग के दरोगा पांडेय, जो कई बाधाओं को पकड़ लेते हैं उन्होंनेे पूजा-पाठ कराई थी, इसके बाद उस गांव की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। जब यह बात सामने आई तो पंचायत प्रतिनिधि व ग्रामीण गांव के सभी घरों से चावल के कुछ दाने लेकर अंबिकापुर में रहने वाले पुजारी से मुलाकात करने के लिए पहुंच गए। उन्होंने ग्रामीणों की बातों को सुनने और चावल को लेकर अंर्तध्यान होने के बाद बताया कि गांव के देवता नाराज हैं, इस कारण ऐसी स्थिति बनी है। इसके लिए पूजार्चना गांव के सभी देव स्थल में करने और गांव में पूर्ण रूप से शराब बंदी करने के लिए कहा गया। पुजारी ने कहा कि इसके बाद गांव में खुशहाली आ पाएगी। उनकी बातों को सुनने के बाद पंचायत के प्रतिनिधियों ने पुन: बैठक किए। बैठक में शराबबंदी का फैसला एक स्वर में सर्वसहमति से गांव और यहां रहने वाले लोगों की खुशहाली को देखते हुए सुनाया गया। यह भी निर्णय लिया गया कि गांव में शराब बनाने पर 10 हजार रुपये व शराब सेवन करने पर पांच हजार रुपये अर्थदंड वसूला जाएगा। इसके बाद से गांव के लोगों की दिनचर्या बदल गई है। प्रतिदिन समयानुसार गांव के देव स्थल में विधिवत पूजा की जा रही है। शराबबंदी के बाद के हालात की गुप्त निगरानी पंचायत के द्वारा की जा रही है। निगरानी दल को तलाश ऐसे लोगों की है जो चोरी-छिपे शराब बना रहे हैं या सेवन कर रहे हैं। हालांकि पंचायत के निर्णय के बाद ऐसा मामला सार्वजनिक नहीं हो पाया है।
इनका कहना है-
गांव के विकास व नाराज ग्राम देवताओं को खुश करने के लिए गांव के लोग पुजारी द्वारा बताए अनुसार रोजाना पूजार्चना कर रहे हैं। शराब बंदी के बाद के हालात पर निगरानी रखी जा रही है। अगर कोई शराब बनाते या पीते पकड़ में आता है तो उनसे जुर्माना वसूलना तय किया गया है।
कैलाश सिंह नेताम, सरपंच

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