बलरामपुर जिले के चम्पा ग्राम का 22 वर्षीय जितेन्द्र कुछ दिन पूर्व सड़क दुर्घटना में अपना कुल्हा गवां चुका था, इस कारण वह चल फिर नहीं पा रहा था। स्वजन उसे शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल अंबिकापुर लेकर पहुंचे। यहां आर्थो विभाग के डॉ.अनुरंजन दुबे व डॉ.हेमंत ने युवक का सफल ऑपरेशन किया है।
निजी अस्पताल में एक लाख से ज्यादा होता खर्च-
राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ.लखन सिंह ने बताया कि रीढ़ की हड्डी व कुल्हे का ऑपरेशन करना काफी जटिल है। इसके बावजूद चिकित्सकों ने हिम्मत के साथ पहली बार रीढ़ व कुल्हे का सफल ऑपरेशन कर दोनों मरीजों की जान बचाई है। अगर यह ऑपरेशन किसी निजी अस्पताल में मरीजों को कराना पड़ता तो एक से डेढ़ लाख रुपये खर्च करने पड़ते। यहां दोनों का ऑपरेशन पूरी तरह से नि:शुल्क किया गया है। युवा चिकित्सकों के द्वारा जिस प्रकार गरीब मरीजों को राहत दी जा रही है, उसकी जानकारी मिलने पर आए दिन अस्पताल में जटिल ऑपरेशन के लिए पीडि़त पहुंच रहे हैं। कमी पडऩे पर आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति की जा रही है ताकि मरीज को ऑपरेशन के लिए और कहीं भटकना न पड़े।
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