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छत्तीसगढ़

छात्रा की हत्या के मामले में अफवाहों पर विराम लगाने हर पहलू को खंगालेगी एसआइटी की टीम शासन की मंशानुरूप तेज-तर्रार अफसरों को जांच की जिम्मेदारी, भ्रामक बातों से बचने का आग्रह


जरही/भटगांव। सूरजपुर जिले के कोयलांचल जरही-भटगांव में छात्रा से दुष्कर्म व फांसी पर लटका की गई जघन्य हत्या की जांच एसआइटी की टीम करेगी। देश की राजधानी दिल्ली में ऐसी ही एक घटना हुई थी, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। पीडि़ता को काल्पनिक नाम निर्भया से लोग जानते हैं। देश के सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी युवती के साथ दुष्कर्म जैसी घटना होती है तो उसका नाम उजागर नहीं किया जाता है। इसके विपरीत लोगों ने कानून की सारी हदों को पार कर  पुलिस को गाली दी, जघन्य हत्याकांड की बलि वेदी पर चढऩे वाली छात्रा का नाम खुले मंच पर लिया गया। पूर्व मंत्री तथा कई दिग्गजों ने इस निर्भया को 17 वर्ष का बताया, जबकि दस्तावेजों के हिसाब से उसकी उम्र घटना के दिन 18 वर्ष 9 माह है।
संविधान और कानून को नहीं जानने वाले कुछ लोगों ने आरोपित को सरेआम चौक पर लेकर आने और आग लगा देने, फांसी पर लटका देने जैसी बात भी कह डाली। पुलिस की जांच को भी खासा प्रभावित किया गया। सोशल मीडिया पर लोग इस मामले को लेकर कई तरह का भ्रम फैलाते नजर आए। आरोपित एक से अधिक होने जैसे कमेंट इंस्टाग्राम में चलते रहे, जिससे भ्रम की स्थिति बन गई। फिजूल की बातें करने वाले खुद पुलिस की जगह विवेचक बन गए। कैंडल मार्च के दूसरे दिन भी कई बेबुनियाद बातें सामने आई। 26 मार्च को कैंडल मार्च, शोक सभा वाराणसी मुख्य मार्ग के चौक पर आयोजित की गई, उस दौरान छात्रा की मौत पर राजनीति ने सारी हदें पार कर दी। बाहर से आए कुछ तथाकथित नेताओं ने मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। उन्हें उस वक्त तक नहीं पता था कि आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दी है। भटगांव पुलिस हाय-हाय, भूपेश बघेल हाय-हाय के नारे लगा वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस ने जब आंदोलन कारियों में कुछ को मामले में पुलिस का साथ देने तथा घटना के संबंध में बयान देने कहा, तो समाज के ठेकेदार गायब हो गए। इन बातों को पुलिस के आला अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार की मंशानुरूप विशेष जांच टीम का गठन किया है, ताकि हर पहलुओं पर सूक्ष्मता से विवेचना कर आरोपित को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके। विशेष जांच दल में जिले के तेजतर्रार पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों को शामिल किया गया है। एसआइटी की टीम ने अपील की है कि भ्रामक पोस्ट व अफवाहों से बचें और जांच में सहयोग करें, तभी दोषी को कठोर सजा मिल पाएगी।

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