के बाद भी कार्रवाई नहीं किए जाने से जनपद पंचायत प्रतापपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की कार्यक्षमता सवालों के घेरे में है। ताजा मामला महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना का है, जिसमें अनियमितता के दो मामले प्रकाश में आए हैं। शिकायतकर्ता ने जनपद पंचायत के सीईओ मो.निजामुद्दीन को लिखित शिकायत पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार पहला मामला ग्राम पंचायत बगड़ा का है, जिसमें वर्ष 2017-18 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत भवानी जनरल स्टोर के संचालक विनोद जायसवाल ने ग्राम पंचायत बगड़ा के कदमपारा में आंगनबाड़ी भवन के निर्माण कार्य हेतु 99 हजार 460 रुपये का छड़ व सीमेंट सप्लाई किया था, इसके भुगतान हेतु उन्होंने बगड़ा के सरपंच व सचिव को मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी जनपद पंचायत प्रतापपुर के समक्ष बिल दिया। बिल के सामग्री प्राप्तकर्ता वाले भाग में सरपंच व सचिव के द्वारा सील सहित हस्ताक्षर भी किए गए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उक्त बिल की राशि को सरपंच व सचिव के द्वारा इंजीनियर, मनरेगा के कार्यक्रम अधिकारी व बाबू के साथ मिलीभगत कर एक फर्जी सप्लायर मेसर्स आलेख अनिमेश के नाम से बिल लगा राशि का बंदरबांट कर लिया गया है। दूसरा मामला ग्राम पंचायत नवाडीह का है, जहां वर्ष 2019-20 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत भवानी जनरल स्टोर के ही द्वारा चुरैल डूबा नाला में स्टाप डेम के लिए 99 हजार 570 रुपये का छड़ व सीमेंट सप्लाई किया गया था। इसमें भी शिकायतकर्ता ने मनरेगा के कार्यक्रम अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर भुगतान हेतु सरपंच व सचिव को बिल दिया मगर इसकी राशि भी किसी फर्जी सप्लायर के नाम से बिल लगाकर डकार ली गई। इस संबंध में शिकायतकर्ता ने 10 अप्रैल 2020 को जनपद के सीईओ के पास शिकायत की थी, मगर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं होते देख पुन: मामले को शिकायत के माध्यम से संज्ञान में लाया गया है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि इन दोनों मामलों में कार्रवाई करते हुए सप्लाई की गई सामग्री की राशि नहीं दिलाई गई तो वे जनपद पंचायत परिसर में आमरण-अनशन पर बैठने मजबूर होंगे, जिसकी जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, जनपद सीईओ की कार्यक्षमता पर उठे सवाल फर्जी बिल लगाकर निर्माण कार्य की राशि के गबन का है आरोप, शिकायतकर्ता ने दी आमरण-अनशन की चेतावनी

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