अंबिकापुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय का प्रथम दीक्षांत समारोह राज्यपाल एवं कुलाधिपति अनुसुइया उइके की अध्यक्षता एवं विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में शनिवार को गरिमामयी माहौल में संपन्न हुआ। राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अंबिकापुर के ऑडिटोरियम भवन में आयोजित दीक्षांत समारोह का शुभारंभ शोभायात्रा, दीप प्रज्ज्वलन, कुलगीत गायन व राष्ट्रगान से हुआ। विभिन्न संकायों के 231 उपाधि धारकों को स्वर्ण पदक, पांच पीएचडी उपाधि धारकों और दो मानद उपाधि धारकों को सम्मानित किया गया। डॉक्टर ऑफ लेटर्स की उपाधि से सरगुजा के वृक्ष मित्र स्व.ओम प्रकाश अग्रवाल एवं कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली स्व.सुंदरीबाई को सम्मानित किया गया। दीक्षांत समारोह में पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए ड्रेस निर्धारित किया गया था। पुरुष पायजामा-कुर्ता, जैकेट व गमछा तथा महिलाएं कोसे की साड़ी व गमछा के साथ पदक व उपाधि प्राप्त किए।
राज्यपाल एवं कुलाधिपति अनुसुइया उइके ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उपाधि धारकों एवं उनके अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा कि विद्यार्थियों की परिश्रम और उनके पालकों के संस्कार का प्रतिफल है कि आज उन्हें सुखद अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा यह प्रथम दीक्षांत समारोह मील का पत्थर साबित हो रहा है, जिसमें 360 स्वर्ण पदक के साथ-साथ 76 पीएचडी उपाधि दी जा रही है। इसके साथ-साथ वर्ष 2010 से 2020 तक 38,982 स्नातकोत्तर और 75,278 स्नातक की डिग्री भी प्रदान की जा रही है। उन्होंने पदक पाने वाले छात्रों के साथ उनके अभिभावकों को भी श्रेय दिया, जिनके योगदान के कारण विद्यार्थी डिग्री पाने में सफल हुए हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो इसलिए शासन द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी अपनाया गया और शिक्षा को आगे बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि हमारा ज्ञान समाज में पद-प्रतिष्ठा दिलाता है, डिग्री लेना ही सब कुछ नहीं होता, बल्कि विचार, संस्कार और व्यवहार भी होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि ज्ञान शिक्षा के साथ संस्कार बहुत जरूरी होता है। ज्ञानार्जन जीवन भर चलना चाहिए और जीवन में सीखना बंद नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें हमारी सफलता छिपे रहती है। उन्होंने संत गहिरा गुरु को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जनजाति समाज के लिए बहुत समाज सुधार किए और अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की कमी की ओर संकेत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ शासन को विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की कमी को दूर करना चाहिए, तभी विश्वविद्यालय अधिकाधिक विकास कर पाएगा। उन्होंने उपाधि धारकों को आह्वान किया कि सर्वोत्तम कार्य करते हुए वे समाज का संवाहक बनें। विद्या, ज्ञान, शिक्षा को घर, परिसरों तक सीमित न रखें, बल्कि देश समाज में इसकी उपयोगिता हो। विवि के कुलपति प्रोफेसर अशोक सिंह ने कहा सरगुजा अंचल धान का कटोरा के रूप में विख्यात है, इसे हम ज्ञान का कटोरा भी बनाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय को सर्वोत्तम व अग्रणी संस्थान बनाने का विश्वास दिलाया। उन्होंने कहा कि सरगुजा विश्वविद्यालय पूरी तरह से इको फ्रेंडली है। भकुरा-स्थित निर्माणाधीन परिसर में अगले वर्ष तक समस्त विभाग संचालित होने लगेंगे। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम, संसदीय सचिव चिंतामणी महराज एवं पारसनाथ राजवाड़े, लुंड्रा विधायक डॉ.प्रीतम राम, मनेंद्रगढ़ विधायक डॉ.विनय जायसवाल, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष शफी अहमद, आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं वनौषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक, महापौर डॉ.अजय तिर्की, कमिश्नर जीआर चुरेंद्र, संत गहिरा गुरु विवि के कुलसचिव बिनोद कुमार एक्का, कलेक्टर संजीव कुमार झा, पुलिस अधीक्षक अमित तुकाराम काम्बले सहित अन्य जनप्रतिनिधि, विश्वविद्यालय कार्यपरिषद के सदस्य रातनरेश गुप्ता, डॉ.राजकुमार उपाध्याय, प्रोफेसर डॉ.अनिल सिन्हा सहित छात्र-छात्राएं एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।
संसाधनों की उपलब्धता करनी होगी सुनिश्चित
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय स्थापना 2008 में होने के बाद वर्ष 2022 में प्रथम दीक्षांत समारोह होना आश्चर्यजनक है। दीक्षांत समारोह बहुत पहले शुरु हो जाना चाहिए था। दो वर्ष पहले समारोह आयोजन की तैयारी की गई थी, लेकिन कोरोना के कारण यह संभव नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि प्रथम दीक्षांत समारोह में शामिल होना गर्व की बात है। विश्वविद्यालय में शोध एवं नए अकादमिक विषयों तथा अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। वर्तमान में शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों की कमियां हैं, जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है। हम सभी को इसके लिए मिलकर प्रयास करना होगा।
सुखद यात्रा अस्थायी होने के साथ होती है शुरु-रेणुका सिंह
दीक्षांत समारोह में भारत सरकार की राज्यमंत्री रेणुका सिंह ने दीक्षाधारी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप लोगों को अपनी इच्छा शक्ति जीवन भर बनाए रखनी चाहिए। संस्था की प्रगति छात्रों की प्रगति पर ही निर्भर करती है। उन्होंने इस दीक्षांत को विशेष अवसर बता संत गहिरा गुरु के योगदान को भी रेखांकित किया। आगे उन्होंने कहा कि भारत आत्मनिर्भर तभी होगा, जब प्रत्येक भारतीय मजबूत बनेगा। उन्होंने कहा भारतीय युवा आज प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। उनकी बड़ी-बड़ी उपलब्धियां देश के काम में आ रही हैं। भारत-भक्ति के शाश्वत भाव से प्रत्येक छात्र को अपने हृदय में जगाए रखना है। उन्होंने छात्राओं की अधिक भागीदारी को देखते हुए कहा कि नारी सशक्तिकरण का रूप आज दीक्षांत समारोह में दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि भारत देश में दो-दो राष्ट्रपति भवन हैं, यह हमारे लिए गौरव की बात है।
उपाधि पाने वाले छात्र-छात्राएं करें नाम रोशन-टीएस सिंहदेव
छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि महान संत और समाज सुधारक के नाम पर संत गहिरा गुरु के नाम पर विश्वविद्यालय नाम होना गर्व की बात है। इसी प्रकार 13 वर्ष के बाद हमारी सरकार के कार्यकाल में अवरोध समाप्त होकर प्रथम दीक्षांत समारोह का गरिमामय आयोजन होना भी गर्व की बात है। यह समारोह प्रदेश के दूरस्थ आदिवासी अंचल में उच्च शिक्षा के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता और परिपूर्णता का प्रतीक है। उन्होंने स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले मेधावी छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि उन सभी छात्रों के जीवन का यह अविस्मरणीय अवसर है। यह विश्वविद्यालय संभाग के पांच जिलों के 75 महाविद्यालयों में सबसे बड़ा शिक्षा संस्थान है। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय उत्तरोत्तर उन्नति करें। यहां से शिक्षा-दीक्षा और उपाधि पाने वाले छात्र-छात्राएं अपने परिवार, समाज के साथ प्रदेश का नाम रोशन करें।
समारोह दीक्षा का अंत नहीं बल्कि शुरुआत-गिरीश पंकज
छत्तीसगढ़ राष्ट्र भाषा प्रचार समिति के अध्यक्ष एवं दीक्षांत समारोह के मुख्य वक्ता गिरीश पंकज ने कहा कि सरगुजा उनकी प्रारंभिक कर्मभूमि रही है। उन्होंने उपाधि धारकों से कहा कि यह समारोह दीक्षा का अंत नहीं बल्कि शुरुआत है। उन्होंने छात्रों को भारतीयता का बोध कराते हुए कहा कि संकट में हमें अपने देश की याद आती है। यूक्रेन युद्ध से भारत की सरकार ने हजारों छात्रों को स्वदेश ले आया है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी रहे, लेकिन अपनी माटी और माता-पिता से सदैव जुड़े रहें, राष्ट्र को हमेशा ध्यान में रखें। शिक्षा और दीक्षा हमें बड़प्पन सिखाती है, आगे बढ़ाती है। संत गहिरा गुरु महाराज ने अपना जीवन छत्तीसगढ़ की जनजाति के विकास में लगा दिया और अपना अमर मंत्र मनके मनके एक बराबर बताया था। उन्होंने कहा उपभोक्तावादी संसार में जीवन मूल्यों और परंपरा को लोग भूलते जा रहे हैं, जिससे हमारी सांस्कृतिक जडं़े छूटती जा रही हैं। भारतीय संस्कृति राष्ट्र को देवता जन्मभूमि को माता कहना सिखाती है। उन्होंने कहा कि स्वदेश से प्रेम करेंगे तभी हम आगे बढ़ेंगे।
ऑडिटोरियम होगा पूर्णत: वातानुकूलित
राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के ऑडिटोरियम अब पूर्णत: वातानुकूलित और हाइटेक साउंड सिस्टम से परिपूर्ण होगा। पंचायत एवं स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग के मंत्री टीएस सिंहदेव ने अपने उद्बोधन के दौरान ऑडिटोरियम में एसी और उच्च गुणवत्ता के साउंड सिस्टम की आवश्यकता को महसूस करते हुए विधायक मद से ऑडिटोरियम को पूर्णत: वातानुकूलित और हाइटेक साउंड सिस्टम से लैस करने के लिए राशि स्वीकृत करने की घोषणा की।
आदिवासी विकास पुस्तिका का हुआ विमोचन-
फोटो-पीआरओ अंबिकापुर में
संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के अवसर पर राज्यपाल अनुसुइंया उइके एवं विशिष्ट अतिथियों के द्वारा हमर सरगुजा जिला जनजाति विकास के गौरव पत्रिका का विमोचन किया गया। हमर सरगुजा जिला जनजाति विकास के गौरव पत्रिका का लेखन एवं सामग्री का संकलन अपर कलेक्टर अमृत लाल धु्रव के द्वारा किया गया है। पत्रिका में सरगुजा जिले के आदिवासी विभूतियों तथा जनजातियों के विकास को उल्लेखित किया गया है।
500 से अधिक ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं राज्यपाल
फोटो-पीआरओ अंबिकापुर में
संत गहिरा गुरू विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के बाद राज्यपाल अनुसुइया उइके ने सर्किट हाउस में आम जनता की समस्याएं सुनी। लगभग 500 से अधिक ग्रामीणों ने अपनी समस्या से राज्यपाल को अवगत कराया।
महाविद्यालयों में नियुक्त प्रयोगशाला परिचारकों के नियमितीकरण नहीं हो पाने, पेसा अधिनियम 1996 के तहत 42 जनजातियों द्वारा बनाए गए प्रारूप के अनुसार लागू करने, वर्ष 2009 से कार्यरत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण, सेवानिवृत्ति पश्चात स्वत्वों के भुगतान न हो पाने, अंशकालीन कर्मचारियों के नियमितीकरण, आर्थिक सहायता, महाविद्यालय की परीक्षा ऑनलाइन माध्यम से कराने, कोविड काल में कार्य किए कर्मचारियों को नियुक्ति में प्राथमिकता, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण, नवीन कृषि महाविद्यालय की मांग, महामाया पहाड़ पर अवैध अतिक्रमण जैसी कई शिकायतों को राज्यपाल ने गंभीरता से सुना और सभी मामलों पर विचार कर उचित निराकरण के लिए आश्वस्त किया। उन्होंने कहा सभी आवेदनों का परीक्षण कर निराकरण के लिए संबंधित विभागों को भेजा जाएगा। इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार की राज्यमंत्री रेणुका सिंह, कमिश्नर जीआर चुरेन्द्र, कलेक्टर संजीव कुमार झा, एसपी अमित तुकाराम काम्बले सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
उपाधि धारक सर्वोत्तम कार्य करते हुए समाज का संवाहक बनें-अनुसुइया उइके संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय का प्रथम दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के हाथों 238 उपाधि धारक सम्मानित

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