अंबिकापुर। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सरगुजा जिले को क्षय मुक्त बनाने की दिशा में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.पीएस सिसोदिया के निर्देशन में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। समस्त क्षय रोग मरीजों का डॉटा बेस तैयार किया जा रहा है। शिक्षण संस्थान में शिक्षकों व छात्रों को क्षय रोग की जानकारी दी जा रही है, जिससे क्षय रोग से संबंधित सही जानकारी जन-जन तक पहुंच सके। वर्तमान में सरगुजा में 33 केंद्र है, जहां क्षय के कीटाणु की पहचान माइक्रोस्कोप जांच के माध्यम से की जाती है। यह सुविधा प्रत्येक विकासखंडों के साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध है। चार विकासखंड भफौली, सीतापुर, उदयपुर, धौरपुर में ट्रू नॉट जांच की सुविधा उपलब्ध है। एक्सट्रापल्मोनरी क्षय रोग में क्षय रोग की पुष्टि के लिए सीबीनॉट की सुविधा जिला क्षय उन्मूलन केंद्र अंबिकापुर में उपलब्ध है। कलेक्टर संजीव कुमार झा एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक लहंगे द्वारा क्षय रोग नियंत्रण से संबंधित कार्यक्रम की समीक्षा तीन महीने में एक बार की जाती है, क्षय रोग का निदान शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के विभागाध्यक्ष डॉ.रोशन लाल वर्मा की देखरेख में किया जा रहा है। इस बीमारी में अधिकांशत: फेफड़े से लोग प्रभावित होते हैं।
पोषण आहार के लिए दिए 20.32 लाख-
आइसीएमआर संस्था दिल्ली, पिरामल हेल्थ केयर, संगवारी समाज सेवी संगठन के द्वारा सक्रिय रूप से क्षय बीमारी की पहचान व चिन्हित मरीज के निदान हेतु कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में वर्ष 2021-22 में आज दिनांक तक टीबी के कुल 1341 मरीज पाए गए हैं। इन सभी मरीजों का उपचार डॉट्स पद्धति से किया जा रहा है। पोषण आहार योजना के तहत मरीज के खाते में 20 लाख 32 हजार 500 रुपये दिया गया है।
आदिवासी मरीजों को दिए गए 14.93 लाख-
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव की विशेष पहल पर आदिवासी विकास परियोजना के तहत आदिवासी मरीजों को 14 लाख 93 हजार 250 रुपये दिए गए। निक्क्षय पोषण आहार के अंतर्गत प्रत्येक क्षय मरीज को तीन से नौ हजार रुपये प्रदान किया जाता है। क्षय रोग की दवाई खिलाने वाले को एक से पांच हजार रुपये-5000 की राशि दी जाती है। यह राशि संबंधित को खाते में प्रदान किया जाता है।
कोविडकाल में फेफड़े हुए सर्वाधिक प्रभावित-डॉ.शैलेंद्र गुप्ता
जिला क्षय अधिकारी डॉ.शैलेंद्र गुप्ता ने बताया कि कोविड काल में कोरोना संक्रमण से लोगों के फेफड़े प्रभावित हुए है। क्षय रोग के मरीजों में लगभग 20: प्रतिशत का इजाफा हुआ है। उन्होंने बताया क्षय रोग से संबंधित जांच व इलाज पूर्णत निश्शुल्क है। शासकीय अस्पतालों में इलाज की पूरी सुविधा उपलब्ध है, क्षय बीमारी पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है। दो सप्ताह से ज्यादा खांसी होना, खांसी में खून आना, श्वांस फूलना, वजन कम होना, पेट व छाती में पानी भरना, लंबे समय तक पेट में दर्द होना, लंबे समय तक घाव का न सूखना, रीड़ की हड्डी में विरूपता, झटके की बीमारी, नपुंसकता क्षय रोग का लक्षण हो सकता है।
माइक्रोस्कोप से की जा रही क्षय के कीटाणुओं की पहचान वर्ष 2021-22 में आज दिनांक तक टीबी के कुल 1341 मरीज पाए ग

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