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छत्तीसगढ़

केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह ने यूक्रेन में फंसे छात्रों को हरसंभव मदद के लिए किया आश्वस्त मेडिकल के छात्रों ने वीडियो वायरल कर भारत सरकार से लगाई है मदद की गुहार


अंबिकापुर। यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध से बनी खतरे की स्थिति को देखते हुए यहां मेडिकल कालेज की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं के स्वजनों की चिंता बढ़ गई है। हालात को देखते हुए यूक्रेन में मौजूद मेडिकल के भारतीय विद्यार्थी भी वतन वापसी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। सरगुजा और बलरामपुर जिले से अभी तक आठ मेडिकल के विद्यार्थियों के फंसे होने की पुष्टि प्रशासन कर रहा है। दोनों जिले के कलेक्टरों ने छात्र-छात्राओं की सहायता व संपर्क हेतु नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया है। इधर केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह ने फोन से बात करके यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों से वहां की वास्तविक वस्तुस्थिति को जानने का प्रयास किया है।
यूक्रेन में फंसे कुसमी के छात्रों ने वीडियो वायरल कर भारत सरकार से मदद की लगाई गुहार है। विद्यार्थियों ने बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह को बताया है कि यहां मेडिकल कालेज के लगभग 150 विद्यार्थी छत्तीसगढ़ के हैं। केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह ने आश्वस्त किया है कि उनकी सकुशल वतन वापसी के लिए विदेश मंत्री से चर्चा की गई है, जिस पर उन्होंने हरसंभव प्रयास का भरोसा दिलाया है। रेणुका ने कहा है कि उनके संसदीय क्षेत्र सरगुजा के करीब 10 विद्यार्थी और उनके पालकों से फोन पर चर्चा हुई है, वे लगातार उनसे संपर्क में हैं। कलेक्टर संजीव कुमार झा के मुताबिक सरगुजा जिले के अंबिकापुर शहर से छह छात्रों के एमबीबीएस की पढाई करने के लिए यूक्रेन जाना सामने आया है। उन्होंने बताया छात्रों और उनके स्वजनों से सतत संपर्क बना रहे इसके लिए नोडल अधिकारी व उनकी टीम नियुक्त की गई है, जो इनसे संपर्क कर हाल-समाचार लेने में लगे हैं।
रोमानिया बार्डर से हुई वापसी-
स्वजनों से बात होने पर शुभम गुप्ता ने बताया कि उन्हें दूतावास के माध्यम से रेल्वे स्टेशन से रोमानिया बार्डर तक ले जाया जा रहा था, लेकिन खतरे को देखते हुए दूतावास ने जाने से मना कर दिया। इनके द्वारा सुरक्षा का ध्यान रखने कहा गया है। वे मेडिकल कॉलेज के बेसमेंट में रहकर रात गुजार रहे हैं। शुभम की मानें तो मेडिकल से संबंधित भारत के कई छात्र यूक्रेन में हैं। युद्ध की वजह से हवाई सुविधा बंद होने के कारण ये यूक्रेन में ही फंस गए है। इधर रूस और यूक्रेन के बीच जंग से इनकी वतन वापसी कब तक हो पाएगी, यह चिंता स्वजनों को है।
छात्रों ने किया वीडियो वायरल-
यूक्रेन में फंसे छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिला अंतर्गत कुसमी के छात्र ने किया अपना वीडियो वायरल कर भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है। कुसमी के दो छात्र शुभ आशीष मिश्रा व रविकांत मैत्री एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गए हैं। शुभ आशीष के माता-पिता ने भारत सरकार से अपील की है जल्द से जल्द बच्चों को भारत लाने का मार्ग प्रशस्त हो, ऐसी पहल की जाए। इधर बलरामपुर जिले के कलेक्टर कुंदन कुमार ने छात्रों एवं स्वजनों की मदद के लिए नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीता यादव नोडल अधिकारी एवं सहायक नोडल अधिकारी के रूप में अपर कलेक्टर एसएस पैकरा तथा प्रभारी परियोजना अधिकारी साक्षर भारत ओमप्रकाश गुप्ता इनसे संपर्क बनाए हुए हैं।
पानी सप्लाई ठप होने की चिंता-
बलरामपुर जिले के कुसमी निवासी रविकांत्र मैत्री वर्ष 2019 से युक्रेन में रहकर एमबीबीएस की तैयारी कर रहे है। शुभाशीष मिश्रा भी एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए पश्चिमी यूक्रेन गए हैं, इनका एमबीबीएस में दाखिले का पहला वर्ष है। दोनों ही छात्रों ने वीडियो जारी कर यूक्रेन के हालातों पर चिंता जाहिर की है। इन्होंने यूक्रेन में लगातार हो रहे हवाई हमलों का जिक्र करते हुए कहा है कि यूक्रेन में पैसों के लेनदेन बंद हो गए है। किसी भी वक्त पानी की सप्लाई भी ठप्प हो सकती है। रूस ने यूक्रेन के कुछ इलाकों में कब्जा कर लिया है। रूस के राष्ट्रपति द्वारा युद्ध की घोषणा के साथ ही हलचल मच गई है।
भारत वापसी के लिए इनकी सरकार पर नजर-  
अंबिकापुर के कन्या परिसर रोड निवासी शिवम सिंह पिता अभय सिंह, रावत रेसीडेंसी निवासी शुभम गुप्ता पिता उपेंद्र गुप्ता, बाबूपारा निवासी अरुण व विक्रम सिन्हा पिता राजेश सिन्हा तीनों विन्निटसिया इंटरनेशनल मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत, अस्पताल रोड निवासी निलेश कुमार साहू पिता रविंद्र कुमार साहू द्वय टेरनोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी, वसुंधरा विहार निवासी आकृति त्रिपाठी पिता विनोद त्रिपाठी खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी, खारकीव यूक्रेन में पढ़ाई करते है। इसके अलावा बलरामपुर जिले के कुसमी शहर के रहने वाले रविकांत मैत्री और शुभाशीष मिश्रा भी यूक्रेन में अध्ययनरत हैं, सभी की भारत वापसी के लिए सरकार पर निगाह टिकी है। 

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