अंबिकापुर। शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा अनूठी पहल गार्बेज कैफे की शुरूआत की गई थी। लेकिन इस अनूठी पहल पर अब पलीता लगता दिख रहा है। आलम यह है कि जिस गार्बेज कैफे की देश और दुनिया मे तारीफ हो रही थी वो बंद होने के कगार पर है और उस स्थान पर निजी होटल का संचालन हो रहा है। अंबिकापुर नगर निगम द्वारा वर्ष २०१९ में शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए मोर द वेस्ट बेटर द टेस्ट इस स्लोगन के साथ गार्बेज कैफे की शुरूआत की गई थी। अनूठा प्रयोग यह था कि एक किलो प्लास्टिक कचरा लाने पर भोजन व आधा किलो प्लास्टिक लाने पर नाश्ता दिया जाना था। इस अनूठी पहल की देश-विदेशों में चर्चाएं हुई थी। लेकिन अब प्लास्टिक लेकर नाश्ता व भोजन के लिए कोई नहीं पहुंच रहा है। नगर निगम की यह अनूठी योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। अब न तो कचरा प्लास्टिक लेकर लोग यहां पहुच रहे हैं और न ही इसमें दिलचस्पी नजर आ रही है।
नाम गार्बेज कैफे, चल रहा निजी होटल
नगर निगम प्रशासन द्वारा वर्ष २०१९ में प्लास्टिक के बदले मुफ्त भोजन व नाश्ता उपलब्ध कराने के लिए प्रतीक्षा बस स्टैंड में गार्बेज कैफे की शुरूआत की थी। यहां अब पूरी तरह से निजी होटल संचालित हो रहा है। इक्का-दुक्का कभी कभार ही जरूरतमंद प्लास्टिक एकत्र कर पहुंचते हैं। गार्बेज कैफे की आड़ में निजी होटल संचालक की लाखों रुपए की कमाई हो रही है।
कोरोना काल के बाद नहीं आ रहे लोग
वर्ष २०२० में कोरोना काल के बाद से जरूरतमंद प्लास्टिक के बदले भोजन के लिए गार्बेज कैफे नहीं पहुंच रहे हैं। वहीं निगम प्रशासन का मानना है कि लोग प्लास्टिक लेकर नहीं पहुंच रहे हैं यानी शहर प्लास्टिक मुक्त हो चुका है। जबकि पूरे शहर में प्लास्टिक का प्रचलन अभी भी जोरों पर है।
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