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छत्तीसगढ़

नहाय खाय के साथ प्रारम्भ हुआ भगवान भास्कर की आराधना का छठ महापर्व 0 आकर्षक साज सज्जा से दुल्हन की तरह सजाया जा रहा रेणुका नदी का तट 0 छठ पूजा समिति कर रही व्यापक तैयारी 0 छठ घाट पहुंचे जिला व नपा अमले ने लिया तैयारियों का जायजा

सूरजपुर। छठ पर्व को लेकर यहां रेंड नदी पर तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई है। छठ घाट पर साफ सफाई,लाइटिंग आदि के साथ आकर्षक साज सज्जा की जा रही है।तैयारियों में जहां छठ पूजा समिति सक्रिय है वही नगरपालिका भी अपनी ओर से लगी हुई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इधर तैयारियों का जायजा लेने आज एसडीएम रवि सिंह,तहसीलदार प्रतीक जायसवाल,नपा सीएमओ ज्योत्सना टोप्पो आदि छठ घाट पहुँचे थे जहां व्यवस्था को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिया है।सूर्य देव की आराधना का पर्व इस वर्ष  10 नवंबर दिन बुधवार को मनाई जायेगी। छठ के व्रत में मुख्य रूप से सूर्य की उपासना और छठी मईया की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि अच्छे स्वस्थ जीवन व पारिवारिक सुख समृद्धि की कामना के लिये छठ का व्रत रखा जाता है। अब यह पर्व एक संस्कृति बन चुका है और देश से लेकर विदेशों तक में छठ के प्रति आस्था देखने को मिलती है। इस व्रत को छठ पूजा , सूर्य षष्ठी पूजा , डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार सतयुग में भगवान श्रीराम , द्वापर में दानवीर कर्ण और पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने भी सूर्य की उपासना की थी।
0 क्यों होती है सूर्य की आराधना 
छठ पूर्व में सूर्य की आराधना और छठी मैया की विधि विधान से पूजा का बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार छठी माता को सूर्य देवता की बहन माना जाता हैं। कहा जाता है कि छठ पर्व में सूर्य की उपासना करने से छठ माता प्रसन्न होती हैं और घर परिवार में सुख शांति तथा संपन्नता के साथ सभी मनोकामनायें पूरी करती है।
0 चार दिनों होती है छठ पूजा
हिन्दू धर्म में यह पहला ऐसा त्यौहार है जिसमें डूबते सूर्य की पूजा होती है। तिथि अनुसार छठ पूजा चार दिनों की होती है। छठ की शुरुआत चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से होती है , पंचमी तिथि को लोहंडा और खरना होता है। उसके बाद षष्ठी तिथि को छठ पूजा होती है जिसमें सूर्यदेव को शाम का अर्घ्य अर्पित किया जाता है। फिर अगले दिन सप्तमी को सूर्योदय के समय में उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पारण करके व्रत पूरा किया जाता है। इस वर्ष यह त्यौहार 08 नवंबर सोमवार से 11 नवंबर गुरुवार तक चलेगी। छठ पूजा की शुरुआत 08 नवंबर सोमवार को नहाय खाय के साथ हो गया। इस दिन पूरे घर की अच्छे से साफ-सफाई की जाती है और स्नान के करने के पश्चात सूर्य को साक्षी मानकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस दिन चने की सब्जी , चांवल , साग का सेवन किया जाता है। छठ पूजा के दूसरे दिन 09 नवंबर मंगलवार के दिन खरना होगा जो कि छठ पूजा का महत्वपूर्ण दिन होता है , इसे लोहंडा भी कहा जाता है। इस दिन पूरे दिन व्रत किया जाता है और छठ की तैयारियां होती हैं। शाम को नदी सरोवर पर कमर तक जाकर पानी में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। मिट्टी के नये चूल्हे पर आम की लकड़ी से आग जलाकर साठी के चांवल दूध और गुड़ से खीर बनाकर छठी मईया को अर्पित करने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इसके बाद व्रती कुछ भी खाना-पीते नहीं हैं। खरना के अगले दिन छठ पूजा का मुख्य दिन होता है. इस दिन छठी मैया और सूर्य देव की पूजा की जाती है। इस साल छठ पूजा 10 नवंबर को है , इस दिन सुबह – शाम दोनो समय सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। छठ पूजा से अगले दिन छठ पूजा का समापन होता है जो इस बार 11 नवंबर को होगा , इस दिन पुन: नदी या सरोवर पर जाकर पानी में खड़े होकर उगते हुये सूर्य को अर्घ्य देकर पारण के बाद कठिन व्रत पूर्ण किया जाता है। इन चारों दिनों में सभी लोगों को सात्विक भोजन करने , जमीन पर सोने के अलावा और भी कई कड़े नियमों का पालन करना होता है। इन चारों दिनों में छठ पूजा से जुड़े कई प्रकार के व्‍यंजन, भोग और प्रसाद बनाया जाता है।

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