सुविधा अम्बिकापुर। मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में कोरोना वायरस की जांच के लिए स्थापित किया गया वायरोलॉजी लैब अब अन्य गंभीर बीमारियों की जांच में भी सहायक बन रहा है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग जल्द ही लेप्टोस्पायरोसिस व टायफस फीवर की जांच भी शुरू करने जा रहा है। ये दोनों ही बैक्टीरियल संक्रमण हैं और काफी घातक होते हैं। बड़ी बात है कि इन दोनों ही बीमारियों के लक्षण समान्य मलेरिया, टाइफाइड व अन्य बुखार वाली बीमारियों की तरह ही होते हैं। यह एक जीवाणु संक्रमण है जो बग लेप्टोस्पाइरा के कारण होता है। ये जीवाणु पानी और गीले मैदान में पनपते हैं। फिर ये पालतू जानवरों और रोडेंट, चूहों को संक्रमित करते हैं। संक्रमण एक संक्रमित जानवर के मूत्र से या मृत जानवर से संक्रमित ऊतक के माध्यम से फैल सकता हैए जो काफी घातक होता है। वहीं टायफस फीवर पिस्सुओं के काटने से होने वाली इस बीमारी में भी डेंगू की तरह प्लेटलेट्स की संख्या घटने लगती है। यह खुद तो संक्रामक नहीं लेकिन इसकी वजह से शरीर के कई अंगों में संक्रमण फैलने लगता है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर रमणेश मूर्ति ने बताया कि मेडिकल कालेज में इलाज हेतु आने वाले ओपीडी एवं भर्ती मरीजों की जांच सुविधा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अंतर्गत लेप्टोस्पायरोसिस एवं टायफस फीवर जांच शीघ्र प्रारंभ की जानी है। मरीजों को बुखार होने पर मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, निमोनिया, कालाजार, वायरल पेशाब में संक्रमण इत्यादि सबसे पहले सोचे जाते हैं। लेकिन अभी संभावनाओं को देखते हुए उपलब्ध जांच का दायरा बढ़ाकर मरीजों के इलाज की सुविधा में बढ़ोतरी होगी।
