00 सात सूत्रीय मांग
सूरजपुर।अशासकीय विद्यालय संघ ने आज कलेक्टर से मुलाकात कर सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौपा है। मुख्यमंत्री के नाम दिए ज्ञापन में कहा गया है कि द्वारा कोरोना महामारी के मद्देनजर आर्थिक एवम अन्य संकटों से गुजरते हुए समस्त अशासकीय विद्यालयों की स्थिति में सुधार हेतु पहल किया जाए। इस दौरान ललन सिं अध्यक्ष सुरजपुर ब्लॉक, रंजन मुखर्जी सचिव ब्लॉक, के पी शर्मा संचालक ग्लोबल पब्लिक स्कूल, रमा शंकर पांडेय संचालक वेदांता स्कूल एंव पुनीत गुप्त संचालक सृजन स्कूल आदि मौजूद थे। ज्ञापन में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण की शुरुआत से ही प्रदेश के अशासकीय विद्यालय गंभीर संकट में है।इस पूरे दौर में लगभग पांच से सात सौ स्कूल बंद हो चुके हैं जिसके कारण प्रदेश के लगभग लाखों विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हुई है।राज्य सरकार की प्रभावी नीतियों के कारण कोरोना का संक्रमण प्रदेश में अब काफी कम हो चुका है तथा प्रदेश में लगभग सब अनलॉक हो चुका है, अत: 1 जुलाई से COVID 19 के समस्त नियमों का पालन करते हुए 50 प्रतिशत क्षमता के साथ सभी विद्यालय ऑफलाइन प्रारंभ करने हेतु विभाग को निर्देशित करें । विगत सत्र 2020-21 में परिस्थितियाँ विपरीत होते हुए भी शिक्षा को रुकने नहीं दिया गया।स सब के बावजूद भी 40% पालको द्वारा भी ट्यूशन फीस जमा नहीं की गई।
विगत वर्ष 2020-21 तक की आरटीई की लंबित शुल्क प्रतिपूर्ति राशि अशासकीय विद्यालयों को जल्द से जल्द जारी की जाये।विगत 15 महीनो से स्कूल बसों का संचालन बंद है जब तक स्कूल बस प्रारंभ ना हो जाए तब तक सभी स्कूल बसों का रोड टैक्स माफ किया जाए तथा स्कूल बसों का मासिक किस्तों को सामान्य स्थिति होने तक रोक लगाई जाए। बसों की पात्रता अवधि भी 12 वर्षो से 2 वर्ष आगे बढाया जाये।चूँकि स्कूल बसों का संचालन बंद है ऐसे में किस्त पटाने बैंक एवं अन्य फाइनेंस कंपनियां लगातार दबाव बना रही है।स्कूल बसों को जब्त भी किया जा रहा है .संगठन आपसे निवेदन करता है की परिस्थितयो को देखते हुए स्कूल बसों है की किश्त स्कूल खुल जाने तक स्थगित रखी जाए।विगत वर्ष के एक शिक्षा विभाग के मौखिक आदेश के बाद बहुत से अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों ने बगैर टी.सी. के शासकीय विद्यालयों में प्रवेश लिया है .ऐसे बहुत से विद्यार्थियों की फीस अशासकीय विद्यालयों को अभी तक प्राप्त नहीं हुई है. ऐसे विद्यार्थीयों की फीस अशासकीय विद्यालयों को दिलवाई जाये या राज्य शासन इस शुल्क का भुगतान करे ।पूरे राज्य में अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों तथा अन्य कर्मचारियों के परिवार में सदस्यों के सामने भुखमरी जैसी संकट की स्थिति उत्पन्न हो चुका है, जिससे निपटने हेतु सरकार अविलंब कोई प्रभावी कदम उठाया जाय , जिससे शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े समस्त परिवारों को सरकार द्वारा न्याय प्राप्त हो सके।
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