अम्बिकापुर / संयुक्त संचालक एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पी एस सिसोदिया ने बताया है कि विश्व ग्लूकोमा दिवस के अवसर पर 7 मार्च से 13 मार्च तक जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबंद्ध जिला चिकित्सालय में नेत्र जांच सह परामर्श सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया है कि भारत सरकार द्वारा कार्यक्रम का थीम द वर्ल्ड इज ब्राइट सेव योर साइट निर्धारित किया गया है। ग्लूकोमा सप्ताह के दौरान जन सामान्य को ग्लूकोमा या काला मोतिया की जानकारी देने के साथ ही 40 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों की जांच कर निःशुल्क चश्मे बनवाकर हितग्राहियों को उपलब्ध कराया जा रहा है।
मोतियाबिंद को ग्लूकोमा या काॅचबिंद या आम भाषा में काला मोतिया भी कहा जाता है काला मोतियाबिंद आॅखो में होने वाली एक गंभीर समस्या है। इससे हमारी आॅखो में आप्टिक नर्व जो किसी वस्तु का चित्र दिमाग तक पहुचाती है ग्लुकोमा के दौरान हमारी आॅखो पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। लगातार दबाव पड़ने से हमारी आप्टिक नर्व नष्ट हो सकती है। इस दबाव को इन्ट्राआकुलर प्रेशर कहते है। यदि आप्टिक नर्व और आॅखो के अन्य भागों पर पड़ने वाले इस को नियंत्रित न किये तो व्यक्ति हमेशा लिए अंधा हो सकता है। यह किसाी भी उम्र में हो सकता है लेकिन व्यस्क एवं बुजूर्गों में ज्यादा लोग काला मोतिया से प्रभावित हो रहे है। इसका मुख्य इलाज केवल प्रायमरी स्तर में बचाव व समय में पता लगाकर अंधा होने से बचाया जा सकता है।
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