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छत्तीसगढ़

आंवला नवमीं पर विधिविधान से की गई आंवले वृक्ष की पूजा अर्चना

0 जगह-जगह हुआ सामूहिक भोज

सूरजपुर। सोमवार को आंवला नवमीं के अवसर पर जिले में लोगो ने आंवला वृक्ष की विधिविधान से पूजा-अर्चना कर परम्परा के अनुसार सपरिवार आंवला वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन किया। नगर के तमाम मोहल्लों समेत शिव पार्क व अन्य स्थानो पर स्थित आंवला वृक्ष के नीचे प्रातः से ही महिलाओ व बच्चों की भीड़ लगी रही। कार्तिक मास के शुल्क पक्ष की नवमीं को मनाया जाने वाला आंवला नवमीं का त्यौहार जिलेभर में सोमवार को हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने पूजा की थाली सजाकर आंवले के पेड़ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के उपरांत पुत्र प्राप्ति, दीर्घायु एवं स्वस्थ्य काया का आशीर्वाद मांगा। उल्लेखनीय है कि आंवला नवमीं के दिन स्नान, पूजन, तर्पण तथा अन्नदान करने का विशेष महत्व होता है। महत्व के चलते ही महिलाओं को अलसुबह से ही स्नान आदि से निवृत होकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर दान किया।

0 पूर्ण होती है मनोकामना

आंवला नवमी मनाने पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि इस दिन जप, तप, दान आदि करने से व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो जाता है, तथा व्रत करने वाले की सभी इच्छाएं पूर्ण हो जाती है। ऐसी मान्यता है कि, सतयुग का आरंभ भी इसी दिन से हुआ था। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने का विधान है। आंवले के वृक्ष में सभी देवी-देवताओं का वास होता है तथा यह फल भगवान विष्णु को अतिप्रिय है।
0आंवला वृक्ष का पौराणिक महत्व-

स्कन्द पुराण के अनुसार पूर्वकाल में जब समस्त संसार समुद्र में डूब गया था तो जगतपिता ब्रह्मा जी के मन में श्रृष्टि पुन: उत्पन्न करने का विचार आया, वे एकाग्रचित होकर परम कल्याणकारी ऊँ नमो: नारायणाय मंत्र का उपांशु जाप करने लगे। वर्षों बाद जब भगवान विष्णु उन्हें दर्शन वरदान देने के लिए प्रकट हुए और इस कठिन तपस्या का कारण पूछा, तो ब्रह्मा जी ने कहा कि हे जगतगुरु मैं पुन: मैथुनी सृष्टि आरंभ करना चाहता हूं आप मेरी सहायता करें। ब्रह्मा जी के करुणाभरी वाणी से प्रसन्न होकर श्री विष्णु जी कहा कि ब्रह्मदेव आप चिंता न करें मेरे ही संकेत से आपके हृदय में सृष्टि सृजन की लहरें उठ रही हैं। श्रीविष्णु जी के दिव्यदर्शन एवं आश्वासन से ब्रह्मा जी भावविभोर हो उठे। उनकी आंखों से भक्ति-प्रेम वश आंसू बहकर नारायण के चरणों पर गिर पड़े, जो तत्काल वृक्ष के रूप में परिणित हो गए।

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