मट्टी के दीपक बनाने वाले कु हारों को धन वर्षा की उ मीद
दिवाली और धनतेरस के लिए सजा बाजार, रंग बिरंगी लाइट्स लोग कर रहे खूब पसंद
अंबिकापुर. दीपावली पर धन लक्ष्मी को प्रसन्न करने मिट्टी के दीपक बनाने वाले कु हारों की चाक अब तेजी से चलने लगी है और बाजार में दीपक भी पहुंच चुका है। लकिन मिट्टी के दयों को ज्यादा सं या में नहीं खरीदा जा राहा है। लोग पूजा करने के हिसाब से २५ से ५० दीए खरीद रहे हैं। कोरोना काल में इस बार उन्हें अच्छी बिक्री की उ मीद है। अंबिकापुर बाजार में मिट्टी का दीपक बेच रह एक कु हार ने बताया कि घरों में मिट्टी के दीपक, मटकी आदि बनाने माता-पिता के साथ उनके बच्चे भी हाथ बंटा रहे हैं। कोई मिट्टी गूंथने में लगा है तो किसी के हाथ चाक पर बर्तनों को आकार दे रहे हैं। दीपावली पर्व पर धन लक्ष्मी को प्रसन्न करने मिट्टी के दीपक जलाए जाते हैं।
दिवाली और धनतेरस के लिए बाजार सजने शुरू हो गए हैं। बाजार में दिवाली को लेकर सजावट का सामान बेचने के लिए कारोबारियों ने दुकानें सजा दी हैं। घरों को सजाने वाली रंग बिरंगी लाइट्स लोग खूब पसंद कर रहे हैं। खरीदारी के समय शारीरिक दूरी के नियम को नजरअंदाज किया जा रहा है। बाजार के स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि यह रंग-बिरंगी लाइट्स उन्होंने दिल्ली से लाई हैं। रंग-बिरंगी लाइट्स 200 से तीन से चार हजार रुपये में बिक रही हैं। इसके अलावा बाजार में राज्यस्थानी तोरण द्वार, सिल्वर की बनी भगवान गणेश व माता लक्ष्मी की मूर्तियां भी 100 से 1000 रुपये तक उपलब्ध है। बाजार में रंग-बिरंगी खुशबू की रेडिमेड कैंडल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी है। दिवाली के लिए बाजार पूरी तरह सज गए हैं। लोअर बाजार में इन दिनों दिवाली की खरीदारी के लिए लोगों की काफी भीड़ उमड़ रही है। इसके साथ ही दीवाली के लिए विशेष प्रकार की मिठाई तैयार की गई है। महिलाओं ने घरों के लिए सजावटी वस्तुएं पसंद करना व लेना शुरू कर दिया है। इस दिवाली पर डेढ़ सौ से लेकर पांच सौ रुपये तक के चमचमाते झूमर बाजार में मिल रहे है। मंगलवार को भी महिलाएं बाजार में इलेक्ट्रानिक लड़ियों, मालाओं, झूमर व फूलों को निहारते नजर आई। दिवाली पर घर सजाने के लिए रंगोली का रोल सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए मार्केट में रेडीमेड रंगोली के सांचे, रेडीमेड रंगोली और डिजाइन्स मिल रहे हैं। बाजार में लोग शारीरिक दूरी का भी ध्यान नहीं रख रहे हैं। दीपों के त्योहार दीपावली में दीए जलाने का चलन कम होता जा रहा है। लोग दिवाली पर दीये जलाते तो हैं लेकिन घर को रोशन करने के लिए नहीं बल्कि पूजा व दरवाजे के बाहर रखने के लिए। यह देखा जा रहा है कि लोगों में घरों को इलेक्ट्रानिक लड़ियों से सजाने का उत्साह बढ़ रहा है। पहले तो शहरों में ही बिजली से घरों को चमकाया जाता था मगर अब गांव में भी इसका चलन बढ़ गया है। लोग रंग-बिरंगी लड़ियों से ही घरों को सजाते हैं और दीपों की सं या कम होती जा रही है।
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