अंबिकापुर. जिले में कोरोना मरीजों के स्वस्थ्य होने की दर यानी रिक्वरी रेट ९१.६३ प्रतिशत जा पहुंचा है। जो अने उच्च्तम स्तर पर है। इस स्तर तक पहुंचाने में सबसे मददगार साबित हुआ होम आइसोलेशन कांसेप्ट। यह विकल्प ऐसे समय जिले के संक्रमित मरीजां को दिया गया, जब जिला प्रशासन ने यह भांप लिया था कि अगस्त-सितंबर में संक्रमण की र तार सर्वाधिक होगी। सितंबर में कोविड हॉस्पिटल में बेड कम पड़ रहे थे। कोविड केयर सेंटर भर चुके थे। तब इस विकल्प ने संजीवनी का काम किया। अब तक कुल ४०५८ लोग कोरोना संक्रमित पाए जा चुके हैं। इनमें से २३७३ मरीजों ने होम आइसोलेशन का विकल्प चुना। जिसमें २०६९ मरीज हेम आइसोलेशन में रहकर स्वास्थ्य हो चुके हैं। जिले में ४२८ एक्टिव मरीज हैं। जिसमें १३ मरीज अंबिकापुर कोविड अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं शेष ३०३ मरीज होम आइसोलेशन में रहकर अपना इलाज करा रहे हैं।
होम आइसोलेशन से ये मिली सीख
ट्रीटमेंट मैनेजमेंट- कोरोना संक्रमित मरीज घरों में अपना और अपनों का इलाज करते हुएर मेडिकल उपकरणों से परिचित हुए। जैसे- प्लस, ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर, वैपोराइजर, वीपी डिवाइज, ऑक्सीजन सिलेंटर, के प्रेशर मैनजमंट और दवाओं के डोज से।
ट्रीटमेंट ऑन कॉल- लॉकडाउन और आज भी डॉक्टर फोन पर मरीजों को एडवाइज दे रहे हैं। विडियो कॉल, वॉट्सऐप कॉलिंग और अन्य प्लेटफार्म के जरिए डॉक्टर ने मरीजों बिना छुए इलाज दिया। मरीज स्वास्थ्य हुए।
ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल- मरीजों ने जाना की ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल कितना अहम होता है। स्थिति यह हुई की घर में अगर कोई संक्रमित हुआ तो अन्य सदस्यों ने पहल से प्रिवेंटिव दवाएं लेनी शुरू कर दीं। लोग ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं।