बढ़ी दरों से परिवहनकर्ता व आमजन परेशान, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन…
बैकुंठपुर/ रेत खदानों की निविदा के बाद ठेकेदारों द्वारा शासकीय दर से ज्यादा राशि लिए जाने से नाराज़ रेत परिवहनकर्ताओं ने कलेक्टर कोरिया को ज्ञापन सौंपकर उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया। जिस कलेक्टर कोरिया ने कार्यवाही का आश्वासन दिया है।
विदित हो कि जिले में रेत खदानों की निविदा होने के बाद अब तय है कि रेत के दरों में
बढोतरी होगी। ऐसे में रेत परिवहनकर्ताओं द्वारा ज्यादा भाड़ा लेने से शासकीय निर्माण के साथ आमजनों पर निर्माण कार्यों में इसका प्रभाव पडेगा। जिसे देखते हुए बैकुंठपुर सहित आसपास के रेत परिवहनकर्ता
कलेक्टर से मिले और उन्हें अपनी परेशानी से
अवगत कराया। जिस पर कलेक्टर ने उन्हे कहा कि वे इस मामले को देखेगें। वहीं संसदीय सचिव व बैकुंठपुर विधायक अंबिका सिहदेव ने रेत के रायल्टी की दरों को लेकर प्रशासन और ठेकेदार से चर्चा करने की बात कही है। उनका कहना है कि बेवजह दरों में बढोतरी नहीं होनी चाहिए। जो दर सरकार द्वारा निर्धारित है उस दर पर आम लोगो को रेत
मुहैया होना चाहिए। इसे लेकर वो आगे चर्चा कर
रही है। इसके अलावा विपक्षी दल भाजपा के
द्वारा भी इसका विरोध किया जा रहा है।उनका कहना है कि ठेका
प्रणाली लोगों का राहत देने के लिए की गई है ना
कि वाहन मालिकों और उपभोक्ताओ को लूटने के लिए नही। इसका पूरजोर विरोध किया जाएगा। कोरिया जिले में विधानसभा चुनाव से ही रेत परिवहन मुख्य मुद्दे
के तौर पर देखा जाता रहा है। और विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने इस मुद्दे को ज़ोर-शोर से उठाया भी था। कांग्रेस की सरकार बनने के राज्य शासन ने नदियों से रेत निकालने को लेकर नियमों में परिवर्तन कर ठेका प्रणाली लागू कर दिया है। इधर कोरिया जिले में पहली बार ठेका प्रणाली लागू हो गयी
है। नदियों पर ठेकेदारों के लोगों ने अपनी पूरी
कमान संभाल रखी है। ऐसे में प्रतिदिन जो नदियों से रेत निकाल कर अपना व्यवसाय करते थे, उन्हें अब
परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसे देखते हुए बड़ी संख्या में रेत परिवहनकर्ता बुधवार को कलेक्टर से मिलने पहुंचे। उन्होने अपने सौपे ज्ञापन में बताया कि जो उन्हे रसीद दी जा रही है उसमें मूल्य अंकित
नहीं है। जिसके कारण मनमाना दर लिया जा रहा है। उन्हें 3 घन मीटर का 2200 रू देना पड़ रहा है। ऐसे में अलग से भाडा जोडकर उपभोक्ता तक रेत काफी
महंगी हो जाएगी।
उन्होने बताया कि ठेकेदार द्वारा रायल्टी से लेकर सरकारी दरों से काफी उंचे दर पर रेत बेची जा रही है, जबकि सरकारी दर काफी कम है। रेत परिवहनकर्ताओं का कहना है कि यदि दर सामान्य नहीं किया जाता है तो वे आने वाले समय में आंदोलन करेगें।