0 परमेश्वरी को अहमियत देकर एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश
0 जिले के नेता हुए मायूस
सूरजपुर। सजनवा बैरी हो गए हमार,,,,, सत्ता से लेकर संगठन तक गहरी पैठ रखने वाले सूरजपुर के नेताओ का हाल प्रदेश पदाधिकारियों की जारी सूची में शायद इसी तरह का हो गया है। गुटबाजी व खींचतान की राजनीति शायद यहां की पहचान बन चुकी है। जिसकी जानकारी पार्टी के आलाकमान तक गाहे बगाहे यहीं के नेताओ के माध्यम से पहुंचती रही है। जिसका खामियाजा यह हुआ कि लम्बे अंतराल के बाद भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी की जारी सूची में भाजपा आलकमान ने जहाँ एक ऒर सूरजपुर के कई नेताओं को हासिये पर डाल दिया है तो वही दूसरी ओर एक नई महिला को संगठन में जगह देकर एक बड़े वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। मंगलवार को भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी की सूची जारी हुई तो जिले के कई दिग्गज नेताओं के उम्मीदों पर पानी फिर गया। कभी संगठन से लेकर सत्ता तक मे सूरजपुर की तूती बोलती थी और मंत्री से लेकर संतरी तक इस जिले के हुआ करते थे। लेकिन वक्त के साथ साथ जिले में भाजपा की गुटबाजी भी ऐसी बढ़ी की एक दूसरे के लिए तलवारे निकलने लगी और तलवारे भी ऐसी की पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल सब जाने है कि तर्ज पर सब सरे आम होने लगा। वर्ष 2013 हो या वर्ष 2018 का विधानसभा चुनाव जिले में भाजपा की ऐसी दुर्गति हुई कि कुछ बचा ही नही । 2013 में तो फिर भी एक सीट से इज्जत बच गई थी लेकिन 2018 का परिणाम सबके सामने है। सवाल इससे इतर यह है कि क्या संगठन ने इस बार नेताओ को ही सबक सिखाने का मन बना लिया या माजरा कुछ और है। जिले के कई नेताओं को उम्मीद थी कि उन्हें प्रदेश संगठन में जगह मिलेगी पर किसी दिग्गज को कोई जगह नही मिली। अलबत्ता,पार्टी ने भटगांव की एक नई महिला को संगठन में जगह देकर चौका जरूर दिया। बताया जाता है कि पार्टी आलाकमान ने परमेश्वरी राजवाड़े को प्रदेश मंत्री बना कर जिले के एक बड़े वोट बैंक को साधने के साथ अब नए चेहरों को ही मौका देने की ठान ली है। जिले के भटगांव विधानसभा क्षेत्र जो कभी सूरजपुर व पिलखा विधानसभा का हिस्सा हुआ करता था और इस इलाके को भाजपा का गढ़ माना जाता रहा, पर परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया यह विधानसभा से यह मिथक टूट गया है। वर्ष 2008 में हुए पहले चुनाव में स्व रविशंकर त्रिपाठी जैसी शख्सियत के मैदान में होने से इज्जत बच पाई ,पर दुर्भाग्य रहा कि वे अपना कार्यकाल नियति के कारण पूरा कर नही पाए और यहां 2011 में उपचुनाव की नौबत आ गई । इस चुनाव में भी कुछ छुटभैय्या नेताओ के कारण सरकार को चुनाव जीतने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ गया था। खैर, तब रजनी रविशंकर चुनाव जीत गई । लेकिन उसके बाद से कांग्रेस ने यहां जातिगत कार्ड खेल कर ऐसी सेंध लगाई है कि अब भाजपा को भी दांये बांये सोचना पड़ रहा है। बताया जाता है कि इसी सोंच को लेकर श्रीमती राजवाड़े को संगठन में जगह दी गई है, अब यह अलग बात है कि भाजपा को इसका कितना लाभ मिल पाता है यह तो भविष्य की बाते है, पर कार्यकारणी से जिले के नेताओ को मायूस होना पड़ा है।
0 जिला कार्यकारिणी के लिए जद्दोजहद
जिले में भाजपा की कमान बाबूलाल अग्रवाल के हाथों सौंपी गई है। वे भी अपनी कार्यकारणी के लिए जदोजहद में लगे हुए है । उनकी कार्यकारणी में भी जगह पाने के लिए जिलास्तर के नेता जुगाड़ में लगे हुए है। नई बॉडी में जगह पाने कुछ ऐसे लोग भी सक्रिय है जो काफी दिनों से पार्टी में रह कर भी अपने कर्मो से कोमा में थे। बहरहाल, देखना यह दिलचस्प होगा कि सियासत के मझे हुए खिलाड़ी बाबूलाल अग्रवाल अपनी कार्यकारणी में कैसे और कैसे चेहरों को जगह देकर जिले में संतुलन कायम करते है…? फ़ोटो बाबूलाल
