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छत्तीसगढ़

बिहारपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा का हlल बेहाल

0 स्वास्थ्य सुविधा के आभाव में दो और नवजात शिशुओं की हुई मौत
0एक माह के अन्दर 5 नवजात की गई जान

बिहारपुर। सूरजपुर जिले के दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल बेहाल है। प्रशासन के प्रयासों के बावजूद भी व्यवस्था में कोई सुधार होता दिखाई नही पड़ रहा है। जिले में जननी सुरक्षा का हाल बुरा है, सरकार लाख दावे कर ले पर न तो गांवो में स्थिति सुधर रही और न ही सरकार की योजनाओं का लाभ ही मिल पा रहा है। सरकारी वाहन के नाम पर करोड़ो फूंके जा रहे है पर जरूरतमंदों को इसका लाभ नही मिल पा रहा है। ओड़गी ब्लॉक के कोल्हुआ गांव में बीती रात 2 नवजात बच्चों की हुई मौत से सरकारी वायदे ओर इरादे पर सवाल खड़े कर दिए है। यहां पखवाड़े भर में 5 नवजात की मौत स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण हुई है। बताया गया है कि गुरूवार की शाम को कोल्हुआ की शांति पंडो को प्रसव पीड़ा पर बुलेरो वाहन बुक कर मोहरसोप अस्पताल लाया जा रहा था कि रास्ते मे वाहन में ही प्रसूता ने बच्चें को जन्म दिया और कुछ देर बाद नवजात की मौत हो गई,यही हाल इसी गांव की सुमित्रा के साथ हुआ उसने भी प्रसव पीड़ा पर बोलेरो से बिहारपुर ले जाते वक्त रास्ते मे बच्चे को जन्म दिया और कुछ देर बात वाहन में ही बच्चे ने दम तोड़ दिया जबकि तीसरी घटना में कछिया की मानकुंवर भाग्यशाली रही जिसे टेम्पो से मोहरसोप उप स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था ,जहाँ उसने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है इसके पहले इसी महीने में अंगारमति पंडो व बुदून नाम की महिला के नवजातों की मौत हो चुकी है एक तो जुड़वा बच्चा था बताया जाता है कि वर्ष 2017 में कोल्हुआ में मलेरिया ने महामारी का रूप धारण कर लिया था तब बड़ी संख्या में लोगो की जान चली गई थी उस समय तत्कालिक रूप राहत दिलाने के लिए वहां स्वास्थ्य विभाग को केम्प लगाना पड़ा था तब स्थिति काबू में हुई थी। उस दौरान कोल्हुआ में उप स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया था और वहां 2 स्वास्थ्य कर्मी तैनात किए गए थे। परंतु समय के साथ इस स्वास्थ्य केंद्र में अब ताला लटका रहता है और स्वास्थ्यकर्मी निलंबित किये गए तो फिर आज तक किसी की पोस्टिंग ही नही की गई सवाल यही है कि उपस्वास्थ्य केंद्र की उपयोगिता ही समाप्त कर दी गई तब ही तो आये दिन ताला बंद रहता है किसी की पोस्टिंग नही हुई हद तो तब है जब पिछले दिनों जिले के कलेक्टर यहां पहुँचे थे और उनकी संज्ञान में यह बात आई भी पर व्यवस्था नही सुधरी जबकि उन्होंने इसे ठीक करने सीएमओ को ताकीद किया था। ओड़गी ब्लॉक मुख्यालय से बिहारपुर की दूरी करीब 80 किमी है और स्वास्थ्य विभाग के नियमो के अनुसार वाहनों की सुविधा केवल ब्लॉक मुख्यालयों तक ही है । ऐसे में चाह कर भी इस इलाके के लोगो को सरकार की इस सुविधा का लाभ नही मिल सकता । पर उपस्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं को ठीक कर उन्हें फोरी राहत दी जा सकती है दोनों नवजात की मौत में जो बात सामने आ रही है उसके अनुसार उन्हें गांव में राहत मिली नही और रास्ते इतने खराब थे कि अस्पताल पहुचने के पहले बच्चे का जन्म हो गया और उसमें भी राहत नही मिलने से बच्चों की असमय मौत हो गई ,जो इस इलाके के लोगो की नियति बन गई है इसके साथ साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बिहारपुर का भी कर नामे कम नहीं है बिहारपुर क्षेत्र में लगातार मौसमी बिमारी बढ रही है लेकिन यहाँ सिर्फ दिखावे की इलाज किया जाता है और डाॅक्टर अपने जिम्मेदारी से हटाने की प्रयास करते है कोई भी समुचित इलाज नहीं किया जाता है थोड़ी थोड़ी प्राब्लम के लिए मध्यप्रदेश के बैढन के लिए रेफर किया जाता है ज्ञात हो कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बिहारपुर में डाक्टरों के नियुक्ति को लेकर लगातार मांग किया जा रहा था और इस मांग को प्रसाशन ने बिहारपुर में दो एमबीबीएस डाक्टरों की नियुक्ति की जिससे क्षेत्र में आस लगाए जा रहे थे कि अब क्षेत्र में इलाज के लिए दर दर भटकना नहीं पडेगा। लेकिन लोगो को यह उम्मीद भी निराश कर गया चांदनी बिहारपुर के समस्त क्षेत्रवासियों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को तत्काल सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास मांग किया गया है |

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