धुंआ रहित तंबाकू मुख कैंसर का प्रमुख कारण
अम्बिकापुर / राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत कोटपा एक्ट (सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम) 2003 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं जिले को तम्बाकू के दुष्प्रभाव से बचाने हेतु जिले के समस्त विभागों को एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यषाला का आयोजन तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तकनीकी सहायक संस्था ”ब्लूम्बर्ग – एक पहल” द युनियन द्वारा जिला सरगुजा में आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में संयुक्त संचालक डॉ0 पी0एस0सिसोदिया ने तम्बाकू के सेवन से व्यक्ति को होने वाले दुष्परिणाम की जानकारी देते हुए कहा कि तम्बाकू सेवन करने से व्यक्ति शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर हो जाता है। उसके दुष्परिणाम निकट भविष्य में तंबाकू के सेवन श्वसन तंत्र के कैंसर, फेफड़े, संपूर्ण ऊपरी जठरांत्र संबंधी, यकृत (लीवर), अग्न्याशय, गुर्दा, मूत्राशय, मौखिक कैविटी, नाक कैविटी (गुहा), गर्भाशय ग्रीवा, आदि से समस्याओं से जुड़ा होता हैं। धुंआ रहित तंबाकू मुख कैंसर का प्रमुख कारण है। उन्होंने आम नागरिकों से तम्बाकू रोकथाम एवं जागरूकता हेतु धुम्रपान दुकान के आस-पास न करने दें सभी निजी संस्थान जहां आम पब्लिक का आना-जाना होता है सार्वजनिक स्थान होता है। यदि कोई व्यक्ति मना करने पर भी धूम्रपान करता है, तो इसकी शिकायत 1800-110-456 टोल फ्री नंबर पर दें। धुम्रपान में सहयोग हेतु माचिस, लाईटर या ऐष ट्रे धुम्रपान करने वालों के लिए देना या व्यवस्था बनाना दंडनीय अपराध है, धूम्रपान करते पाये जाने पर 200 रूपये का जुर्माना वसूला जा सकता है। तम्बाकू उत्पाद का प्रत्यक्ष प्रदर्शन पूर्णतः उल्लंघन है। तम्बाकू विक्रेता को तम्बाकू के रोकथाम एवं जन सामान्य में जागरूकता लाना व तम्बाकू रोकथाम संबंधी बोर्ड लगाया जाना अनिवार्य है साथ ही 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को तम्बाकू का सेवन गैर कानूनी है। उन्होंने बताया कि व्यक्ति में नशे की अन्य आदतों वाले पदार्थों द्वारा गतिविधियों में सहनशीलता विकसित होती हैं। तम्बाकू पदार्थ के सेवन से कार्बन मोनो ऑक्साईड रक्त में लेकर जाने वाली ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देता हैं। यह सांस लेने में तकलीफ का कारण बनता है। धूम्रपान के सेवन का परिणाम फेफडो में जमने वाले पदार्थ टार एक चिपचिपा अवशेष हैं, जिसमें बेन्जोपाइरीन होता है, जो कि घातक कैंसर होने वाले “कारक एजेंटों” के नाम से जाना जाता है।
तम्बाकू के रोकथाम हेतु तकनीकी सहयोगी संस्था द यूनियन के विधिक सलाहकार डॉ0 ख्याति जैन ने कोटपा एक्ट तथा सार्वजनिक स्थलों में धूम्रपान एवं तम्बाकू के सेवन रोकथाम हेतु चालानी कार्यवाही के प्रक्रिया को विस्तार से बताया। नोडल अधिकारी डॉ0 शैलेन्द्र गुप्ता ने एनटीसीपी कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि भारत सरकार ने पूरे भारत में तम्बाकू नियंत्रण कानून को लागू करने के लिए वर्ष 2007-08 में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की शुरुआत की और तम्बाकू के दुष्प्रभावों के बारे मे जनसामान्य में अधिक से अधिक जागरूकता लाया जा सके, किसी भी रूप में धूम्रपान करने वाले एक साथ 30 ऐसे रसायन ले रहे होते हैं, जो कैंसर का कारण बनते हैं। इसके अलावा स्ट्रोक व हृदयाघात की आशंका भी बढ़ जाती है। तंबाकू शरीर के लिए धीमा जहर है। धीरे-धीरे व्यक्ति इसका आदी हो जाता है। उसके बाद चाहते हुए भी इस लत से छुटकारा पाने में दिक्कत होती है।
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