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छत्तीसगढ़

प्रसव के लिए पहुंची महिला के दो भाग में विभक्त बच्चादानी की सेप्टोप्लास्टी सर्जरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पहली बार हुई ऐसीे सर्जरी, भर्ती महिला समय पूर्व प्रसव के लिए हुई थी भर्ती ऑपरेशन के बाद मां-बच्चे को चिकित्सकों ने रखा निगरानी में, स्वस्थ्य होने के बाद दी छुट्टी


अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद जटिल ऑपरेशनों के बेहतर परिणाम सामने आने लगे हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के मार्गदर्शन में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ.रमनेश मूर्ति व अस्पताल अधीक्षक डॉ.लखन सिंह का प्रयास है कि यहां आने वाले मरीजों को कहीं रेफर न करना पड़े। अत्यंत जटिल परिस्थिति में ही मरीज को बाहर भेजा जाए, इसलिए यह अस्पताल रेफरल सेंटर के दाग से मुक्त हो रहा है। इसके पीछे एक कारण किसी विभाग के मरीज को रेफर करने के कारण की कड़ी क्यूरी करना है। इसका लाभ यहां आने वाले मरीजों को मिल रहा है।
हाल में मेडिकल कॉलेज अस्पताल के गायनिक विभाग में एक गर्भवती महिला का चिकित्सकों को टीम ने जटिल ऑपरेशन किया। विभाग की एचओडी डॉ.अविनाशी कुजूर प्रसव के लिए ऑपरेशन थिएटर में पहुंची तो पता चला कि पहली बार गर्भवती हुई महिला का बच्चादानी दो भाग में बंटा हुआ है। इसके बाद सेप्टोप्लास्टी सर्जरी करके बच्चादानी को काट कर एक किया गया। समय पूर्व महिला ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। बच्चादानी दो भागों में बंटे होने के कारण प्रसूता को काफी पीड़ा भी हो रही थी। प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को चिकित्सकों ने अपनी निगरानी में रखा था और आवश्यक उपचार सुविधा मुहैया कराई जा रही थी। दोनों के स्वस्थ होने के बाद इनकी छुट्टी कर दी गई है।
इसलिए एक माह पूर्व हुई डिलेवरी-  
डॉ.अविनाशी कुजूर ने बताया कि सरगवां की एक महिला गर्भवती थी, वह प्रसव तिथि के एक माह पूर्व लेबर पेन महसूस होने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में भर्ती हुई थी। पहली बार मां बन रही महिला के स्वजन नए मेहमान के आने के इंतजार में थे, वहीं समय पूर्व प्रसव की बनी स्थिति को लेकर सशंकित थे। बारी प्रसव कराने की आई तो उसे ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। इस दौरान सामने आया कि महिला का बच्चादानी दो भाग में बंटा है, जिस कारण एक माह पूर्व ऑपरेशन की स्थिति बन रही है। गायनिक विभाग की एचओडी डॉ.अविनाशी कुजूर ने स्थिति देख सर्जरी की तैयारी की और डॉ.स्वप्निल विल्सन के साथ सेप्टोप्लास्टी कर महिला के बच्चादानी को काट कर एक किया और महिला का प्रसव कराया। एनीस्थीसिया डॉ.शिवानी और सिस्टर मसरीता ने दिया। बच्चे को जन्म के बाद एसएनसीयू में रखा गया था। मां और बच्चे के स्वस्थ होने के बाद इनकी छुट्टी कर दी गई है।
सेप्टोप्लास्टी के लिए भेजते थे बिलासपुर-रायपुर  
अस्पताल अधीक्षक डॉ.लखन सिंह ने बताया कि पूर्व में सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण गायनिक विभाग में जटिल केस सामने आने पर प्रसूताओं को बिलासपुर-रायपुर भेजने की नौबत बनती थी। गायनिक विभाग प्रमुख का प्रभार डॉ.अविनाशी कुजूर ने जब से संभाला है, उनकी कोशिश रहती है कि प्रसूता को लेकर स्वजनों को भटकना न पड़े। ऐसे जटिल ऑपरेशन वे सहयोगी चिकित्सक डॉ.स्वप्निल विल्सन व अन्य की मदद से करती आ रही हैं, जिससे प्रसव पीड़ा झेल रही महिलाओं को बाहर ले जाने की नौबत नहीं बनती है।  
बयान-
सरगवां से आई महिला के प्रसव दौरान उसका बच्चादानी दो भागों में बंटा होना सामने आया था। सेप्टोप्लास्टी सर्जरी कर बच्चादानी को काट कर एक किया गया। ऑपरेशन के बाद मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। महिला को अब दूसरे बच्चे के जन्म के समय प्री टर्म डिलीवरी की समस्या नहीं होगी।
डॉ.अविनाशी कुजूर
गायनिक विभाग प्रमुख
मेडिकल कॉलेज अस्पताल

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