उदयपुर। हसदेव अरण्य क्षेत्र के सरगुजा जिले में ग्राम फतेहपुर, साल्ही हरिहरपुर के ग्रामीण आदिवासियों ने परसा कोल ब्लॉक हेतु जबरन भूमि अधिग्रहण एवं फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव को निरस्त करने की मांग को लेकर पुन: अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया है। ग्रामीण मुनेश्वर ने बताया कि वर्ष 2019-20 में भी फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव निरस्त कर प्रस्तावित परसा कोयला खनन परियोजना को निरस्त करने की मांग की गई थी। इसे लेकर ग्राम फतेहपुर में 70 दिनों तक अनिश्चतकालीन धरना दिया गया था। अक्टूबर 2021 में हसदेव अरण्य के सैकड़ों आदिवासी 300 किलोमीटर तक पदयात्रा करके रायपुर पहुंचे। यहां राज्यपाल से मुलाकात के बाद परसा कोल ब्लॉक के प्रभावित गांव के फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव की जांच के आदेश मुख्य सचिव को दिए गए थे, परंतु चार माह के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्राम हरिहरपुर में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया गया है, इसमें प्रदेश भर के आदिवासी समाज के मुखिया सहित देशभर के जनवादी संघर्षों से जुड़े साथियों को आमंत्रित किया जाएगा।
परसा कोल ब्लॉक राजस्थान राज्य विद्युत निगम लिमिटेड को आवंटित हुआ, जिसे विकसित करने और खनन करने का अनुबंध अडानी कंपनी को दिया गया है। कोल ब्लाक की भूमि अधिग्रहण कोल बेयरिंग एक्ट 1957 के तहत की गई है, वह भी पांचवी अनुसूचित क्षेत्र की ग्रामसभाओं की सहमति लिए बिना। जंगल, जमीन की स्वीकृति के लिए वनाधिकार मान्यता कानून के तहत वनाधिकार के दावों की प्रक्रिया की समाप्ति होने के पूर्व तथा ग्रामसभा के फर्जी प्रस्ताव के आधार पर सरगुजा कलेक्टर के द्वारा वर्ष 2018 में एनओसी जारी की गई थी। कंपनी और प्रशासन की मिलीभगत से तैयार ग्रामसभा के फर्जी प्रस्ताव की जांच कार्रवाई तथा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया निरस्त करने ग्रामीण आदिवासी आंदोलनरत हैं। परसा कोल ब्लॉक के बगल में ही परसा ईस्ट केते बासेन कोल खनन परियोजना संचालित है, जिससे राजस्थान को 15 मिलियन टन कोयला प्रतिवर्ष जा रहा है। वाबजूद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोयला संकट का माहौल बनाकर नए कोल ब्लॉक में खनन करना चाहते हैं। रग्रामीणों का आरोप है कि केंद्र व राज्य सरकार वैश्विक स्तर पर पर्यावरण को बचाने, अपने आपको सर्वश्रेष्ठ साबित करने की दौड़ में शामिल है परंतु हजारों साल पुराने सघन वन क्षेत्रों को उजाडऩे की सहमति दे रहे हैं जो अनुचित है। क्षेत्र के जंगल के उजड़ जाने से कई नदी-नाले जो मवेशियों के लिए जीवनदायिनी हंै उनका अस्तित्व खतरे में आ जाएगा। गर्मी बेतहाशा बढ़ेगी, जंगल आधारित आजीविका समाप्त होंगे, मानव हाथी द्वंद का मार्ग प्रशस्त होगा। आंदोलन में शामिल हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के उमेश्वर सिंह आर्मो, ठाकुर राम ओरकेरा, सुनीता पोर्ते, रामलाल करियाम, मुनेश्वर सिंह पोर्ते ने कहा उनकी मांगों को नहीं सुनने पर नेशनल हाइवे में चक्काजाम किया जाएगा।
Leave a reply
