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छत्तीसगढ़

रा*यसभा सांसद पहले भाजपा के कार्यकाल के आंकड़े व परफार्मेंस को देखें


अंबिकापुर। रा*यसभा सांसद रामविचार नेताम द्वारा स्वास्थ्य विभाग के कार्यों एवं परफार्मेंस पर उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष डॉ-जेपी श्रीवास्तव ने कहा है कि रा*यसभा सांसद रामविचार नेताम को भाजपा के कार्यकाल के आंकड़े एवं परफार्मेंस को सामने रखकर कांग्रेस के तीन साल के कार्यकाल में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के मार्गदर्शन में हुए कार्यों की तुलना करनी चाहिए। कोरोना वैश्विक महामारी के बावजूद स्वास्थ्य सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने निरंतर कार्य हो रहा है। गांव&गांव के सरकारी हॉस्पिटल एक्टिव मोड पर हैं। रा*य सरकार द्वारा शिशुओं की मृत्यु दर को शीघ्रातिशीघ्र न्यूनतम करने हेतु वृहद प्रयास किए जा रहे हैं।
डॉ-श्रीवास्तव ने कहा है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वर्ष 201छ के उपरांत स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे विशेष प्रयासों के कारण ही छत्तीसगढ़ में आवश्यक विशेषज्ञ एवं चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती के साथ&साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से स्वास्थ्य के विभिन्न क्षेत्रों के प्रबंधक एवं सहायकों की भर्ती कर स्वास्थ्य के स्तर का उट्टच मापदंड है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015&1च की तुलना में वर्ष 2020&21 में छत्तीसगढ़ में नवजात मृत्यु दर] शिशु मृत्यु दर और पांच वर्ष तक के बट्टचों की मृत्यु दर में बड़ी कमी आई है। भारत सरकार के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण&5 वर्ष 2020&21 के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2015&1च में हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण&4 की तुलना में नवजात और शिशु मृत्यु दर दोनों में 2झ् व 1छ प्रतिशत की कमी आई है। बिहार में च व झ्] गुजरात में 19 व 9] ओड़िसा में 4 एवं छ प्रतिशत की कमी पाई गई है। पांच वर्ष तक के बट्टचों की मृत्यु दर में 22 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
मातृत्व स्वास्थ्य पूर्व वर्षों की अपेक्षा बेहतर&
प्रदेश में मातृत्व स्वास्थ्य की पूर्व वर्षों की अपेक्षा बेहतर स्थिति है। प्रदेश में मातृ मृत्यु का अनुपात वर्ष 2004&0च में झ्झ्5 प्रति 1 लाख जीवित जन्म था] जो 201छ में प्राप्त नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 159 प्रति 1 लाख जीवित जन्म हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015&1च की तुलना में वर्ष 2020&21 में छत्तीसगढ़ में संस्थागत प्रसव 70 प्रतिशत से बढ़कर छच प्रतिशत हुआ है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में प्रसव पूर्व की अपेक्षा 25 प्रतिशत बढ़ा है। प्रसव उपरांत चिकित्सक या अन्य प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दी जा रही सेवा भी झ्2 प्रतिशत बढ़ी है। गर्भवती माताओं को दी गई आयरन एवं फॉलिक एसिड सेवन करने वाली माताओं की संख्या में पूर्व वर्षों की अपेक्षा 177 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।  
ये मिली स्वास्थ्य सुविधाएं&
0 रा*य में 5 मेडिकल कालेज] 21 जिला अस्पतालों में सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट की स्थापना की गई है] जिनकी नियमित मॉनिटरिंग एम्स रायपुर के विषय विशेषज्ञों द्वारा की जाती है। एसएनसीयू को संक्रमण मुक्त रखने निरंतर माइक्रोबियल सर्विलेंस किया जा रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग संस्थागत प्रसव बढ़ाने के प्रयासों के साथ उट्टच जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैकिंग कर रहा है। इनके प्रसव हेतु माइक्रोबर्थ प्लांनिंग की जा रही है] जिससे महिलाओं एवं होने वाले नवजात दोनों को उचित समय में सही स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
0 गुणवत्तापूर्ण मातृत्व स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने हेतु प्रदेश में 25 दएमसीएच विंग½ मातृत्व एवं शिशु अस्पताल] 5छ एफआरयूएस क्रियाशील हैं। स्वास्थ्य सुविधा को सुदृढ़ करने हमर अस्पताल] ब्लड बैंक] जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का उन्नयन किया जा रहा है।
0 ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के लिए प्रदेश के सुदूर आदिवासी अंचलों में संचालित हाट&बाजारों में झ्5च मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से अब तक 21 लाख च2 हजार से अधिक व्यक्तियों के रक्तचाप] मधुमेह] सिकलसेल] एनीमिया] हिमोग्लोबिन] मलेरिया] टायफाइड जैसी बीमारियों के जांच उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
0 मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान से बस्तर में मलेरिया के मामलों में 55 प्रतिशत की कमी पाई गई। मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान से पूरे रा*य में परजीवी सूचकांक 5-झ्1 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2021 में 0-75 प्रतिशत हो गई है।
0 प्रदेश में विगत झ् वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र स्वास्थ्य की आपूर्ति हेतु झ्5झ्9 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर प्राथमिक एवं उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर स्थापित किए गए हंै। यहां गर्भवती माताओं&शिशुओं के स्वास्थ्य के साथ ही कुल 12 प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं ग्रामीणों को मिल रही हंै। वरिष्ठ नागरिकों को घर पहुंच स्वास्थ्य सेवा] दीर्घकालीन रोगों के मरीजों को घर तक प्रतिमाह दवा उपलब्ध कराई जा रही है।

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